नक्सली हमला: 72 सुरक्षाकर्मी मारे गए

पुलिस गश्त (फ़ाइल फ़ोटो)
Image caption नक्सलियों के साथ मुठभेड़ जारी है

भारत के छत्तीसगढ़ राज्य के दंतेवाड़ा ज़िले में केंद्रीय रिज़र्व पुलिस बल के लगभग सौ जवानों पर माओवादी विद्रोहियों ने घात लगाकर हमला किया है. अब तक मिली जानकारी के मुताबिक 72 सुरक्षाकर्मी मारे गए हैं.

कई सुरक्षाकर्मियों को अभी भी माओवादियों ने घेर रखा है. दोनों पक्षों के बीच मुठभेड़ चल रही है. सरकार ने हेलिकॉप्टरों के ज़रिए घायलों को घटनास्थल से सुरक्षित स्थान पर पहुँचाने की बात कही है.

जब से भारत सरकार ने उन राज्यों में सुरक्षा बलों का अभियान चलाया है जहाँ माओवादी सक्रिय हैं, तब से इसे सुरक्षाबलों के ख़िलाफ़ सबसे बड़ा हमला माना जा रहा है.

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमन सिंह ने बीबीसी को बताया कि 72 सुरक्षाकर्मी मारे गए हैं और आठ घायल हैं. उनका कहना है कि 400 से 500 माओवादी विद्रोहियों ने सुरक्षाबलों पर हमला किया है.

'रणनीतिक चूक'

दंतेवाड़ा ज़िले में सुरक्षाबलों पर तीन स्थानों पर हमले हुए हैं.

केंद्रीय गृह मंत्री पी चिदंबरम ने इस घटना के बारे में कहा, "छत्तीसगढ़ पुलिस और अर्धसैनिक बलों ने मिलकर माओवादियों के ख़िलाफ़ साझा अभियान तैयार किया था. लेकिन मुझे लगता है कि रणनीति में चूक हो गई और वे माओवादियों के जाल में फँस गए."

उन्होंने मृतकों की संख्या पर कहा, "मरने वालों की संख्या बहुत ज़्यादा है. ये नक्सलियों की क्रूरता दर्शाता है. मुझे इस घटना से काफी दुख हुआ है."

गृह मंत्री ने बताया कि वरिष्ठ अधिकारियों को घटनास्थल की ओर रवाना किया गया है और वे वहाँ पहुँच कर रिपोर्ट देंगे.

तीन बार हमला

मंगलवार सुबह पाँच बजे केंद्रीय अर्धसैनिक बल यानी सीआरपीएफ़ का दस्ता चिंतलनार थाने के तालमेतला इलाक़े में गश्त के लिए निकला था.

सबसे पहले छह बजे के आस-पास नक्सलियों ने इस दस्ते पर हमला कर दिया.

अचानक हुए इस हमले में जवानों को संभलने का मौका नहीं मिला. इसमें एक सब इंस्पेक्टर और एक जवान की मौत हो गई. चार जवान घायल हो गए.

इस हमले की ख़बर मिलने के बाद एक बचाव दल को भेजा गया. इनके पास बख्तरबंद गाड़ी भी थी.

नक्सलियों ने रास्ते में ही बचाव दल पर हमला कर दिया. इसमें वाहन के चालक और एक जवान की मौत हो गई और पाँच जवान घायल हो गए.

इसके बाद तीसरी पुलिस पार्टी दोनापाल नेशनल हाइवे के रास्ते से घटनास्थल पहुँचने के लिए निकल पड़ी. लेकिन घाटी में जगह-जगह घात लगाकर बैठे माओवादी विद्रोहियों ने इन पर भी हमला कर दिया.

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