'माओवादी सीमापार से हथियार लेते हैं '

  • 8 अप्रैल 2010

गृह मंत्री पी चिदंबरम ने कहा है कि दंतेवाड़ा नक्सली हमले की जाँच होगी और इसका काम तय समयावधि में पूरा कर लिया जाएगा.

पत्रकारों के सवालों के जवाब में उन्होंने ये भी कहा कि नक्सलवादी सीमापार से हथियार ख़रीदते हैं.

उन्होंने कहा, “जब नक्सली सुरक्षाबलों पर हमला करते हैं तो वे हथियार लूट ले जाते हैं और वे सीमापार से भी हथियार खरीदते हैं. सीमा पर हथियारों के लिए अच्छा-ख़ासा बाज़ार है. पूर्वोत्तर में विद्रोहियों को हथियार कहाँ से मिलते हैं? सीमा पर से हथियार आसानी से खरीदे जा सकते हैं और ग़लत तरीके से भारत में लाए जाते हैं. नक्सलवादियों के पास देसी हथियार भी होते हैं.”

जब इस बारे में उनसे और सवाल-जवाब किया गया तो चिदंबरम ने कहा कि हथियारों के ये बाज़ार कहाँ है ये किसी से छिपे नहीं है. उनका कहना था, “इंटरनेट में सर्च डालेंगे तो पता चल जाएगा. भारत-नेपाल सीमा खुली है. मयामार के साथ फ़ेंसिंग नहीं हुई है. बांग्लादेश सीमा कमोबेश खुली है.”

'केंद्र सरकार मददगार की भूमिका में'

नक्सलवादियों के धन के स्रोत्रों के बारे में गृह मंत्री ने कहा कि नक्सलवादी पैसे के लिए बैंक लूटते हैं और खनन कंपनियों से पैसा ऐंठते हैं.

उन्होंने कहा कि नक्सलवादियों के खिलाफ़ अभियान चलाने और इलाक़ों पर दोबारा नियंत्रण हासिल करने के लिए केंद्र राज्य सरकारों को अर्धसैनिक बल देगा.

साथ ही उनका कहना था कि अभियान जारी रहेगा या और तेज़ किया जाएगा ये निर्णय ऑपरेशनल स्तर पर लिए जाना है और राज्य सरकारों को ही लेना होगा.

उन्होंने एक बार फिर स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार की भूमिका शुरु से ही एक मददगार की रही है और ये बात किसी को नज़रअंदाज़ नहीं करनी चाहिए.

गृह मंत्री ने कहा, "दंतेवाड़ा वाली घटना में भी संयुक्त फ़ैसला लिया गया था- उसमें ज़ोन के आईजी, ज़ोन के डीआईजी और सीआरपीएफ़ के डीआईजी शामिल थे और क्रियान्वन ज़िले के एसपी ने किया".

चिदंबरम ने कहा कि दंतेवाड़ा घटना के बाद से किसी भी राज्य सरकार ने अतिरिक्त मदद नहीं माँगी है.

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