राणा दासगुप्ता की किताब पुरस्कृत

राणा दासगुप्ता
Image caption राणा दासगुप्ता की उपन्यास सोलो को राष्ट्रमंडल पुरस्कार मिला है

ब्रितानी-भारतीय लेखक राणा दासगुप्ता के उपन्यास 'सोलो' को राष्ट्रमंडल पुरस्कार के लिए चुना गया है.

इसके लिए उन्हें 10 हज़ार ब्रितानी पाउंड यानी लगभग सात लाख रुपए का पुरस्कार दिया गया है.

दासगुप्ता 38 वर्ष के हैं. वे इंग्लैंड के केंट इलाक़े में पैदा हुए और अब दिल्ली में रहते हैं. पुरस्कार का निर्णय लेने वाले जजों ने उनकी 'व्यग्रता' के लिए उनकी सराहना की.

ऑस्ट्रेलियाई लेखक ग्लेंडा गेस्ट ने अपनी पहली किताब सिडन रॉक के लिए पुरस्कृत हुईं. उनकी प्रशंसा अलग अलग किरदारों के ख़ूबसूरत चित्रण के लिए की गई.

राष्ट्रंडल लेखक पुरस्कार हर साल ब्रिटेन के पूर्व उपनिवेशों में साहित्य की सराहना के लिए दिया जाता है.

राष्ट्रमंडल देशों के लेखक जो फ़ाइनल में पहुंचे थे वे अपनी क़िस्मत का फ़ैसला सुनने के लिए भारत की राजधानी दिल्ली पहुंचे. उनकी रचनाओं पर आमने-सामने बहस हुई.

इस समारोह में अफ़्रीका, दक्षिण पूर्व एशिया और प्रशांत महासागर के इलाक़े, कैरिबियन और कनाडा, दक्षिण एशिया और यूरोप के क्षेत्रीय विजेताओं का भी फ़ैसला किया गया.

दोनों विजेता राणा दासगुप्ता और ग्लेंडा गेस्ट अपनी पहली बड़ी साहित्यिक जीत पर ख़ुशी मना रहे हैं.

दासगुप्ता की किताब में साधारण सच्चाई और कल्पना का मेल नज़र आता है. इसके बारे में जजों का कहना था कि हालांकि इसमें कहानी को 'ख़तरे' में डालने का साहस लिया गया है लेकिन फिर भी यह 'ब्रेथटेकिंग' यानी असाधारण है.

कॉमनवेल्थ फ़ाउंडेशन के अध्यक्ष मार्क कॉलिंस ने विजेताओं की उनकी 'बेहतरीन साहित्यिक सलाहियत' के लिए सराहना की.

उन्होंने कहा, "जजों के ज़रिए चुनी गई दो किताबें हमें हमारी परंपरागत सोच के विपरीत अप्रत्याशित यात्रा और चुनौतियों पर ले गईं."

जजों के अध्यक्ष निकोलस हसलक ने कहा, "इनाम जीतने वाली किताबें नए रास्तों की खोज हैं जो पाठकों को उनके आरामपसंद माहौल से बाहर ले जाती हैं."

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