अदालत का फ़ैसला, कश्मीर में बंद

कश्मीर पुलिस
Image caption बंद के दौरान कई इलाक़ों में कर्फ़्यू जैसा माहौल रहा.

दिल्ली की एक अदालत के ज़रिए छह कश्मीरियों को लाजपतनगर बम विस्फोट मामले में अपराधी ठहराए जाने के विरुद्ध आज भारत प्रशासित कश्मीर घाटी में एक बंद रखा गया जिससे सामान्य जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है.

अदालत ने ये फ़ैसला गत आठ अप्रैल को सुनाया था. अपराधित घोषित किए जाने वालों में एक महिला फ़रीदा डार भी शामिल है.

अदालत ने अन्य चार अभियुक्तों को निर्दोष ठहरा कर उन्हें बरी कर दिया है.

आज कश्मीर बंद का आह्वान पृथक्तावादी गठबंधन, सर्वदलिय हुर्रियत कॉंफ़्रेंस के एक गुट ने किया है जिसका नेतृत्य सैयद अली शाह गीलानी कर रहे हैं.

कश्मीर हाई कोर्ट बार एसोसिएशन ने बंद का समर्थन किया है.

पूरी कश्मीर घाटी में आज दुकानें बंद रहीं और ट्रेफ़िक भी स्थगित रही.

सोपोर, बारामुला और श्रीनगर में पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच संघर्ष हुआ, पुलिस ने सोपोर में आंसू गैस के गोले फेंके और हवा में गोलियाँ चलाईं.

पुलिस ने पुराने श्रीनगर के कई इलाक़ों में आज सुबह से कर्फ़्यू जैसी पाबंदियाँ लगाई थीं.

कश्मीर हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष मियाँ अब्दुल क़य्यूम ने बीबीसी को बताया, "इस मामले में अभियुक्तों को फ़ेयर ट्रायल नहीं दिया गया है."

उन्होंने इसका उदाहरण देते हुए कहा, "अदालत ने जान-बूझ कर केस को लंबा खींचा. उन्होंने कहा कि पुलिस के ज़रिए चालान पेश किए जाने के साढ़े चार साल बाद अदालत ने अभियुक्तों के ख़िलाफ़ इल्ज़ाम लगाए जो कि कुछ दिनों में होना चाहिए था."

उन्होंने कहा कि मामले की सुनवाई के दौरान चार बार जजों की बदली हुई और चार बार वकीलों को नए सिरे से बहस करनी पड़ी.

अब्दुल क़ैयूम ने कहा, "कश्मीरी वकील दिल्ली में किसी अभियुक्त की विकालत नहीं करते क्योंकि उन्हें वहाँ परेशान किया जाता है."

उन्होंने कहा कि हाल में एक जज ने एक ज़मानत की अर्ज़ी रद्द करते हुए अपने फ़ैसले में लिखा कि कश्मीर वालों के अलगाव वादियों के साथ संबंध हैं

अब्दुल क़ैयूम ने एक अभियुक्त के इक़बाले-जुर्म पर भी संदेह वयक्त किया.

ध्यान रहे कि दिल्ली के लाजपतनगर में 1996 में एक शक्तिशाली बम विस्फोट हुआ था जिसमें 13 लोगों की मौत हो गई थी और लग-भग 40 अन्य घायल हो गए थे.

जज ने कहा है कि वे अपराधी ठहराए गए लोगों के ख़िलाफ़ 17 अप्रैल को सज़ा सुनाएंगे.

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