दंतेवाड़ा पर विपक्ष ने सरकार को घेरा

गृह मंत्री चिदंबरम ने राज्यसभा में अपने बयान में कहा कि नक्सलवादियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई के लिए राज्य सरकारें ज़िम्मेदार हैं.

उनका कहना था कि केंद्र सरकार नक्सलवादियों के ख़िलाफ़ अभियान में राज्य सरकारों की मदद करने को तैयार है.

चिदंबरम ने कहा कि माओवादियों का लक्ष्य सरकार का तख्ता पलट करना है.

दूसरी ओर विपक्ष ने सरकार को लेकर आड़े हाथों लिया.

राज्यसभा में विपक्ष के नेता अरुण जेटली ने कांग्रेसी नेताओं के रवैए की आलोचना की और कहा कि नक्सलवादियों के ख़िलाफ़ कड़ी कार्रवाई की ज़रूरत है.

अरुण जेटली ने इस मुद्दे पर गृह मंत्री चिदंबरम का बचाव किया, लेकिन साथ ही कहा कि सरकार इस मुद्दे पर विभाजित है.

इसके पहले गृह मंत्री चिदंबरम लोक सभा में बयान नहीं दे पाए.

दंतेवाड़ा हमले पर विपक्ष ने लोक सभा और राज्यसभा दोनों सदनों में हंगामा किया और दोनों की कार्यवाही कई बार स्थगित करनी पड़ी.

लोक सभा में भारतीय जनता पार्टी के यशवंत सिन्हा ने चर्चा की शुरुआत की लेकिन उनकी बातों पर कांग्रेस के सदस्यों ने आपत्ति की.

इसके बाद फिर हंगामा मच गया और शोरशराबे को देखते हुए स्पीकर मीरा कुमार ने संसद की कार्यवाही दोपहर एक बजे तक के लिए स्थगित कर दी.

ये तय हुआ था कि गृह मंत्री चिदंबरम एक बजे बयान देंगे लेकिन हंगामे के कारण वो भी संभव नहीं हो पाया.

इसके पहले लोक सभा में संसदीय कार्यमंत्री पवन कुमार बंसल ने विपक्षी सदस्यों को शांत करते हुए कहा था कि गृह मंत्री पी चिदंबरम दोपहर एक बजे लोक सभा में इस बारे में बयान देंगे और सदस्य चाहें तो इसके बाद चर्चा कराई जा सकती है.

लेकिन विपक्षी सदस्य इससे संतुष्ट नहीं थे और वो दंडेवाड़ा पर चर्चा के लिए अड़े रहे.

राज्यसभा में भी विपक्ष ने दंतेवाड़ा का मुद्दा उठाया.

दिग्विजय के निशाने पर चिदंबरम

ग़ौरतलब है कि नक्सलियों ने दंतेवाड़ा में केंद्रीय रिज़र्व पुलिस बल यानी सीआरपीएफ़ के कई दस्तों पर घात लगाकर हमला किया था जिसमें 76 जवान मारे गए थे.

इस मुद्दे पर गृह मंत्री चिदंबरम ने इस्तीफ़े की पेशकश भी की थी जिसे प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने ठुकरा दिया था.

इधर कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने गृह मंत्री चिदंबरम पर निशाना साधा है.

एक अख़बार में बुधवार को प्रकाशित दिग्विजय सिंह ने एक लेख में लिखा है, "चिदंबरम किसी मुद्दे पर यदि एक बार अपना मन बना लेते हैं तो फिर उस पर अड़ जाते हैं."

हालांकि उन्होंने चिदंबरम को अत्यंत बुद्धिमान, समर्पित और गंभीर बताकर उनकी सराहना भी की.

उन्होंने कहा, "मैं खुद कई बार उनके बौद्धिक अहंकार का शिकार हुआ हूँ. इसके बावजूद हम अच्छे मित्र हैं. मैं उनकी रणनीति से अलग मत रखता हूं क्योंकि उसमें नक्सलवाद प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के बारे में नहीं सोचा गया है."

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