गुजरात के राज्यपाल ने बिल लौटाया

नरेंद्र मोदी
Image caption नरेंद्र मोदी सरकार ने कहा है कि वे इस मु्द्दे को जनता के बीच ले जाएँगे

गुजरात में राज्यपाल डॉ कमला बेनीवाल ने उस विधेयक को मंज़ूरी देने से इनकार करते हुए लौटा दिया है जिसमें सरकार मतदान को अनिवार्य बनाना चाहती थी और स्थानीय निकायों में महिलाओं को पचास प्रतिशत आरक्षण देना चाहती थी.

गुजरात विधानसभा ने पिछले साल दिसंबर में इस विधेयक को पारित किया था.

विधानसभा अध्यक्ष अशोक भट्ट ने कहा है कि राज्यपाल ने यह विधेयक कुछ दिनों पहले ही लौटाया है.

इसे मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए एक और राजनीतिक झटका माना जा रहा है.

मोदी सरकार ने इस मुद्दे को जनता के बीच ले जाने का ऐलान किया है.

अहमदाबाद में दिव्य भास्कर के स्थानीय संपादक अजय उमठ का कहना है कि मोदी सरकार इस मुद्दे से राजनीतिक लाभ उठाने का भरपूर प्रयास करेगी और कहेगी कि उनकी सरकार महिलाओं को पचास प्रतिशत आरक्षण देना चाहती है और मतदान को अनिवार्य बनाना चाहती है लेकिन कांग्रेस उसे ऐसा नहीं करने दे रही है.

आपत्ति

स्थानीय निकाय क़ानून संशोधन विधेयक को दिसंबर में विधानसभा में ध्वनिमत से पारित किया गया था.

जब इस विधेयक को पारित किया गया था तो कांग्रेस सदन में मौजूद नहीं थी.

इस विधेयक में ग्राम पंचायत और नगर निकायों में महिलाओं तो 33 प्रतिशत की जगह 50 प्रतिशत आरक्षण देने का प्रावधान किया गया था.

इसके साथ ही इसमें यह प्रावधान भी किया गया था कि मतदान को अनिवार्य कर दिया जाए और जो लोग मतदान न करें उन्हें दंडित किया जाए.

राज्यपाल ने इस विधेयक को इस आपत्ति से साथ लौटाया है कि एक तो मतदान को अनिवार्य किए जाने का कोई प्रावधान संविधान में नहीं है इसलिए राज्य में ऐसा कोई क़ानून नहीं बनाया जा सकता.

दूसरे राज्यपाल ने कहा है कि महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण देने का जो प्रावधान है वह महत्वपूर्ण है और इसे विधानसभा में सर्वसम्मति से पारित करवाया जाना चाहिए.

उल्लेखनीय है कि कांग्रेस ने राज्यपाल को ज्ञापन देकर यह आपत्ति जताई थी कि मोदी सरकार ने बिना पूर्व सूचना दिए इस विधेयक में मतदान को अनिवार्य करने का प्रावधान कर दिया था.

कांग्रेस को इस बात पर भी आपत्ति है कि राज्य में 27 प्रतिशत आबादी आदिवासियों की है जो अक्सर एक जगह निवास नहीं करते और उनके लिए मतदान में हिस्सा लेना हर समय संभव नहीं होगा, ऐसे में राज्य में फ़र्ज़ी मतदान को ही बढ़ावा मिलेगा.

जबकि मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी का कहना था कि मतदान को अनिवार्य करने से हर किसी को लाभ होगा.

राज्यपाल ने सरकार से कहा है कि वह महिलाओं को पचास प्रतिशत आरक्षण देने और मतदान को अनिवार्य बनाने के प्रावधानों को अलग-अलग विधेयकों के रुप में पेश कर सकती थी.

वैसे यह पहला मौक़ा नहीं है कि गुजरात में किसी विधेयक के मसले पर राजभवन और सरकार आमने-सामने हैं.

इससे पहले राज्यपाल ने गुजरात संगठित अपराध विधेयक (गुजकोक) को दो बार लौटाया है और राज्य के विश्वविद्यालयों के लिए एक समान क़ानून बनाने की सरकार की कोशिश को भी राजभवन की अनुमति नहीं मिली थी.

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