भारत सरकार से बात नहीं करेंगे: उल्फ़ा

सुरक्षाबल (फ़ाइल फ़ोटो)

असम के अलगाववादी संगठन उल्फ़ा का कहना है कि वो भारत सरकार से तब तक बातचीत नहीं करेगा जब तक कि सरकार संप्रभुता के मुद्दे पर चर्चा करने को तैयार नहीं होती.

ईमेल से भेजे संदेश में यूनाइटेड लिबरेशन फ्रंट ऑफ़ असम (उल्फ़ा) की सैन्य इकाई के प्रमुख परेश बरुआ ने कहा कि उनका संगठन शांति प्रक्रिया को तब तक बहाल नहीं करेगा जब तक कि संप्रभुता का मसला हल नहीं हो जाता है.

ये बयान एक ऐसे सम्मेलन के पहले आया है जिसमें असम के प्रमुख लेखक, बुद्धजीवी, कलाकार और पूर्व नौकरशाह हिस्सा ले रहे हैं.

ये सम्मेलन 24 अप्रैल को असम की राजधानी गुवाहाटी में आयोजित किया जा रहा है और इसका मकसद असम में शांति स्थापना है.

परेश बरुआ ने अपने बयान में कहा,''हम जानते हैं कि 24 अप्रैल को असम के प्रमुख लोग सम्मेलन आयोजित कर रहे हैं लेकिन वे भारत के संविधान के प्रति वचनबद्ध हैं जिसने असम के लोगों के न्यायोजित अधिकारों को छीन लिया है.''

परेश बरुआ का कहना था कि उल्फ़ा बातचीत में तभी शामिल होगी जब भारत सरकार असम की संप्रभुता पर बातचीत के लिए तैयार होगी.

दो महीने पहले परेश बरुआ ने बिना किसी शर्त के बातचीत करने के संकेत दिए थे.

लेकिन उनके नजदीकी लोगों का कहना है कि भारतीय गुप्तचर एजेंसी उन्हें अलग थलग कर रही है और जेलों में बंद अन्य उल्फ़ा नेताओं से बातचीत कर रही है, इससे वो नाराज़ हैं.

जानकारों का कहना है कि बांग्लादेश में उल्फ़ा नेताओं की धरपकड़ और भारत को सौंपे जाने से इस संगठन को धक्का लगा है, यही वजह है कि वो माओवादियों से नजदीकियाँ बढ़ा रहा है.

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