हरिद्वार महाकुंभ की कुछ क्रूर सच्चाइयां

  • 21 अप्रैल 2010
गुमशुदा
Image caption कुछ परिवार से ठुकराए लोग ख़ुद ही वापस अपने घर नहीं जाना चाहते.

महाकुंभ अब समाप्ति की ओर है और उसकी कुछ क्रूर सच्चाइयां सामने आ रही हैं. कुछ लोग बिछड़ गए, कुछ लोग जानबूझ के छोड़ दिए गए, तो कुछ परिवार से ठुकराए लोग ख़ुद ही वापस अपने घर नहीं जाना चाहते.

आस्था में लीन यहां का उत्सव जैसा माहौल अब दुख में बदल गया है.

हरिद्वार महाकुंभ में सैकड़ों लोग गुम हो गए हैं, जिन्हें ढूंढने के लिए उनके परिजन दर-दर भटक रहे हैं. इस बीच बिछड़ने और मिलने का सिलसिला भी जारी है.

दूसरी ओर पिछले छह दिन वहां श्रद्धालुओं के 44 शव भी बरामद हुए हैं जिनमें कई की गंगा में डूबने से मौत हुई है.

हर की पैड़ी के पास बने पुलिस के खोया-पाया केंद्र से लगातार ऐसे लोगों के बारे में घोषणाएं हो रही हैं और अपने परिजनों को ढूंढने के लिए लोगों का तांता लगा हुआ है.

सोनीपत से आए विनय त्यागी अपने भाई अशोक त्यागी की तलाश करते हुए हताश हो चुके हैं.

अपनों की तलाश

वे कहते हैं, "28 साल का भाई था मेरा. गंगा स्नान के लिए आया फिर उसके बाद घर नहीं पंहुचा. हम 14 तारीख़ की शाम से उसे ढूंढ रहे हैं, छोटा भइया था हमारा. क्या पता किसी हादसे का शिकार तो नहीं बन गया."

बिहार के दरभंगा ज़िले से आए एक दल से तीन बुज़ुर्ग महिलाएं बिछड़ गईं और उनके ही 65 और 70 साल के बुज़ुर्ग साथी उनकी गुमशुदगी की रिपोर्ट लिखाने आए हैं.

खोया-पाया केंद्र पर नागपुर की एक महिला रोती-बिलखती आती हैं, उनकी 73 साल की बहन शुभाबाई वागाड़े तीन दिन से नहीं मिल रही हैं और वे ख़ुद मराठी ही बोल पाती हैं.

लेकिन बिहार के भागलपुर की रीता देवी की कहानी अलग है. उन्हें ढूंढने कोई नहीं आ रहा है क्योंकि उनके परिजन उन्हें हर की पैड़ी पर अकेला ही छोड़ के चले गए. वो कहती हैं, "उनके बेटे-बहू उन्हें घर में खाना पीना भी नहीं देते."

Image caption खोया पाया सेंटर पर बिछड़े लोगों को उनके परिजन तलाश रह रहे हैं.

उनका कहना है कि "घर से कोई लेने नहीं आया तो वो गंगा में कूद कर जान दे देंगी."

खोया-पाया केंद्र के इंचार्ज सब इंस्पेक्टर ओमकांत भूषण इसी तरह की एक और घटना बताते हैं.

वे कहते हैं, "शाहजहांपुर की एक 89 साल की महिला यहां गुम हो गई थी और जब उनका नाम-पता करके हमने घर फोन किया तो उनके बेटे ने साफ़ मना कर दिया कि मेरे पास टाइम नहीं है."

डूब रहे हैं लोग

इन गुमशुदा लोगों से जुड़ी चिंताएं तब और भी बढ़ गई है जब हर दिन गंगा में डूब गए लोगों के शव मिल रहे हैं.

कुंभ मेला के पुलिस निरीक्षक आलोक शर्मा स्वीकार करते हैं कि पिछले छह दिनों में 44 लोगों के शव मिल चुके हैं. उन्होंने कहा कि पोस्टमार्टम में पाया गया कि इनमें से कुछ की मौत गंगा में डूबने से हुई जो एक दुर्घटना भी हो सकती है.

आलोक शर्मा का कहना है, "14 तारीख़ के शाही स्नान के दिन हरिद्वार में अप्रत्याशित भीड़ थी और उस एक दिन में हरिद्वार की आबादी से 20 गुना ज़्यादा लोग थे, लिहाजा इस तरह से लोगों की मौत अस्वाभाविक नहीं है."

Image caption कई जगहों पर गुमशुदा की तलाश के पोस्टर चिपकाएं गए हैं

ग़ौरतलब है कि उस दिन साधुओं और श्रद्धालुओं के बीच हुई भगदड़ के बाद सात लोगों की मौत हो गई थी और 17 घायल हुए थे.

आशंका जाहिर की जा रही है कि इस भगदड़ में कुछ और लोग भी मारे गए होंगे, जो अपनी जान बचाने के लिए गंगा में कूदे थे या पुल का एक हिस्सा टूट जाने के कारण नदी में गिर गए थे. लेकिन पुलिस प्रशासन इससे साफ इनकार करता है. अभी इस हादसे की न्यायिक जांच चल रही है.

पुलिस के रेकॉर्ड के मुताबिक़ कुल 30 हज़ार लोग तीन महीने से चल रहे इस मेले में गुम हुए थे लेकिन उनमें से अधिकांश अपने लोगों से मिला दिए गए.

फिर भी अपने परिजनों को ढूंढते और दीवारों पर लगे गुमशुदा लोगों के पोस्टर बयान करते हैं कि इस तस्वीर के कई और पहलू भी हैं.

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