सार्क में भारत-पाक वार्ता के आसार कम

भारत विदेश सचिव निरुपमा राव और पाकिस्तान के विदेश सचिव सलमान बशीर
Image caption भूटान में सार्क सम्मेलन 28 और 29 अप्रैल को हो रहा है.

दक्षिण एशियाई सहयोग संगठन (सार्क) के भूटान सम्मेलन में भारत और पाकिस्तान के बीच द्विपक्षीय बातचीत होगी या नहीं इसपर अटकलबाज़ियां चल रही हैं.

सवाल उठ रहे हैं कि दोनों देश के नेता औपचारिक बैठक करेंगे या फिर वॉशिंगटन की तरह भारत और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री केवल हाथ मिलाएंगे.

भूटान में सार्क सम्मेलन 28 और 29 अप्रैल को हो रहा है.

सार्क की स्थापना के 25 साल हो गए हैं और अधिकतर बैठकों में भारत और पाकिस्तान के रिश्ते ही हावी रहते हैं.

वैसे भारत की विदेश सचिव निरुपमा राव ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री यूसुफ़ रज़ा गिलानी के बीच द्विपक्षीय मुलाक़ात से इंकार किया है.

उनका कहना था, "न तो पाकिस्तान की ओर से द्विपक्षीय बैठक की पेशकश की गई है और न ऐसा महौल है कि बातचीत संभव है."

स्थिति

इस साल 25 फ़रवरी को विदेश सचिव स्तर की बातचीत के बाद से क्या स्थिति बदली है, क्या पाकिस्तान ने भारत के दिए तीन दस्तावेज़ों के पुलिंदे का जवाब दिया है?

इन सब सवालों पर विदेश सचिव का कहना था, "पाकिस्तान ने उन दस्तावेज़ों का कोई जवाब नहीं दिया है जो हमने 25 फ़रवरी की बैठक में दिए थे. न ही पाकिस्तान के विदेश सचिव ने उस बैठक के बाद कोई संपर्क साधा है."

निरुपमा राव का कहना था, "हम चाहते हैं कि मुंबई हमले की जांच में तेज़ी आए, सीमा पार से पिछले कुछ महीने से बढ़ी घुसपैठ चिंता का विषय है और आतंकवादी संगठनों के ज़रिए पाकिस्तान की भूमि का इस्तेमाल अब भी उनकी गतिविधियों के लिए हो रहा है."

निरुपमा राव ने हालांकि ये भी स्पष्ट किया किया कि भारत का मानना है कि दो पडो़सी देशों के लिए बातचीत करते रहना ज़रूरी है और रिश्तों की बेहतरी के लिए वही तरीक़ा सही भी है.

कुछ लोग सोच सकते हैं कि भारत और पाकिस्तान के द्विपक्षीय बैठक नहीं होने से सार्क पर अधिक ध्यान केंद्रित होगा, पर यह भी सच है कि इन दो देशों के मनमुटाव से सार्क के उद्देश्यों की पूर्ति उस तरह से नहीं हो पाई है जैसी की हो सकती थी.

मुंबई हमले के बाद लंबे अर्से तक बातचीत नहीं करने के भारत के निर्णय से जो राजनयिक लाभ उसे हो सकता था वो भी अब संभव नहीं है.

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