विकास की सही सूरत?

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20.26 IST- सभी को अविनाश की ओर से नमस्कार. इंडिया बोल के अगले कार्यक्रम में फिर मिलेंगे.

20.26 IST- अंत में हरियाणा से दिलीप सिंह ने कहा कि सरकार पैसे ख़र्च कर रही है, लेकिन संबंधित महकमे अपना काम ठीक से नहीं कर रही हैं.

20.24 IST- उड़ीसा से रवींद्र भट्ट का आरोप है कि सरकार की ग़लत नीतियों के कारण शौचालयों की सख्या कम है.

20.21 IST- बिंदेशवरी पाठक का मानना है लोगों की मानसिकता बदलने में समय लगेगा और इसके साथ ही शौचालयों की संख्या बढ़ेगी.

20.18 IST- एक श्रोता की राय में मोबाइल इस समय की ज़रूरत बन गया है और शौचालय कम होने की वजह यह है कि यह लोगों की प्राथमिकता में नहीं है.

20.15 IST- शैलेश शर्मा का मानना है कि मोबाइल का अधिक होना निजी कंपनियों की मार्केंटिंग के कारण है जबकि शौचालय बनाने का काम सरकार का है, धीमी गति से चलता है.

20.14 IST- जालौर, राजस्थान से एक श्रोता का कहना है कि सरकार और समाजिक संगठनों ने अपने हिस्से का काम नहीं किया है, इसलिए शौचालयों की संख्या कम है.

20.11 IST- बीकानेर से शिव नारायण की राय में मोबाइल इसलिए अधिक हैं क्योंकि निजी कंपनियां इसके लिए ज़ोरदार ढंग से प्रचार करती हैं जबकि सरकार के शौचालय बनाने की योजना बहुत कारगर नहीं है.

20.07 IST- बिंदेशवरी पाठक का कहना है कि मोबाइल की संख्या शौचालय से हमेशा अधिक रहेगी क्योंकि भारतीय लोग अपनी सोच को नहीं बद पा रहे हैं और उनपर पुराणों वाली मानसिकता अब भी हावी है.

20.05 IST- गुजरात से नवीन का कहना है कि मोबाइल और शौचालय में प्रतिस्पर्धा नहीं होनी चाहिए, दोनों अलग-अलग चीज़ें हैं.

20.04 IST- एक श्रोताओं का मानना है कि लोगों की प्रामिकता में शौचालय नहीं है, इसलिए इसकी संख्या कम है.

20.03 IST- पवन कुमार, दिल्ली से कहते हैं कि एक बड़ी आबादी के पास शौचालय का नहीं होना दुख की बात है.

20:02 IST- पुरोलिया से बीबीसी डॉट कॉम के एक पाठक का कहना है कि मोबाइल का होना विकास का पैमाना नहीं है.

20:01 IST- अविनाश की ओर से आप सबका स्वागत है.

19:58 IST- कार्यक्रम के संचालन के लिए अविनाश दत्त स्टूडियों में आ चुके हैं.

19:51 IST- इस चर्चा में आप भी भाग लीजिए और इसके लिए आप हमें फ़ोन कर सकते हैं रात आठ बजे से साढ़े आठ बजे तक 1800-11-7000 या 1800-102-7001 पर.

19:51 IST- इस बार का विषय है विकास का पैमाना क्या है मोबाइल या शौचालय?

19:00 IST- बोल इंडिया के इस अंक में आपका स्वागत है.

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