संयुक्त संसदीय समिति से जाँच नहीं: प्रधानमंत्री

मनमोहन सिंह
Image caption मनमोहन सिंह का कहना है कि संयुक्त संसदीय समिति की जाँच बहुत गंभीर विषय है

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने फ़ोन टैपिंग और इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) विवाद पर विपक्ष के संयुक्त संसदीय समिति के गठन की मांग को ख़ारिज करते हुए कहा कि इसकी कोई ज़रूरत नहीं है.

समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार जब पत्रकारों ने प्रधानमंत्री से फ़ोन टैपिंग के विवाद की जांच के लिए संयुक्त संसदीय समिति के गठन के संबंध में पूछा तो उन्होंने कहा, "संयुक्त संसदीय समिति किस लिए? ये मामला संयुक्त संसदीय समिति के लिए उपयुक्त नहीं है."

प्रधानमंत्री से जब ये सवाल किया गया कि क्या सरकार ने आईपीएल विवाद पर संयुक्त संसदीय समिति के गठन को ख़ारिज कर दिया है तो उनका कहना था, "मैं नहीं समझता की संयुक्त संसदीय समिति के गठन की आवश्यकता है. संयुक्त संसदीय समिति का गठन एक बहुत ही गंभीर मुद्दा है. हम जल्दबाज़ी में इस निर्णय पर नहीं पहुंच सकते."

मनमोहन सिंह का कहना था कि गृह मंत्री पी चिंदबरम ने संसद में फ़ोन टैपिंग के आरोपों पर सरकार की ओर से सफा़ई दी है.

'बयान को तैयार'

फ़ोन टैपिंग के सवाल पर संसद में प्रधानमंत्री के ख़ुद के बयान देने पर उन्होंने कहा, "मैंने साढ़े तीन बजे से पहले संसद में पहुंचने की बात कही थी, लेकिन संसद को चलने नहीं दिया गया."

ग़ौरतलब है कि सोमवार को फ़ोन टैपिंग के मुद्दे पर दोनों सदनों को विपक्ष के ज़ोरदार हंगामे के बीच स्थगित कर देना पड़ा.

हालांकि सरकार ने स्पष्ट किया कि उसने ऐसा करने के लिए न ही किसी को निर्देश दिए थे और न ही इस मामले में उसे कोई सबूत नहीं मिले हैं.

इससे पहले चिदंबरम ने लोकसभा में कहा, "मैं स्पष्ट तौर पर कहना चाहता हूं कि पिछली संयुक्त प्रगतिशील सरकार ने किसी नेता के फोन टैप करने के निर्देश नहीं दिए थे और न ही तत्कालीन संयुक्त प्रगतिशील सरकार ने इस तरह की किसी गतिविधि के निर्देश दिए हैं."

जबकि विपक्ष की मांग थी कि फ़ोन टैपिंग के मुद्दे पर प्रधानमंत्री के अलावा वो किसी और के बयान को अहमियत नहीं देंगे.

लोकसभा में यह मुद्दा उठाते हुए विपक्ष के नेता लालकृष्ण आडवाणी ने कहा कि यह अत्यंत गंभीर मसला है और वे प्रधानमंत्री से इस पर जवाब चाहेंगे.

संबंधित समाचार