मायावती का हाथ सरकार के साथ

मायावती
Image caption लोकसभा में बहुजन समाजवादी पार्टी के 21 सांसद हैं.

बहुजन समाजवादी पार्टी (बसपा) अध्यक्ष मायावती ने कहा है कि कटौती प्रस्ताव के मुद्दे पर उनकी पार्टी केंद्र सरकार का समर्थन करेगी.

उन्होंने कहा कि बढ़ती महंगाई के कारण उनकी पार्टी को कटौती प्रस्ताव पर केंद्र सरकार का विरोध करना चाहिए था, लेकिन बसपा नहीं चाहती कि इन मुद्दों की आड़ में केंद्र में सांप्रदायिक ताकतें फिर से सत्ता में वापस आएँ.

बसपा की ओर से समर्थन का ऐलान सरकार के लिए अच्छी ख़बर है. लोकसभा में बसपा के 21 सांसद हैं.

फ़ोन टैपिंग और आईपीएल के बाद विपक्षी दल संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) सरकार को बजट में कटौती प्रस्ताव लाकर एक बार फिर मुश्किल में डालने की योजना बना रहे हैं.

राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) कटौती प्रस्ताव का समर्थन कर रहा है.

प्रमुख विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी ने अपने सांसदों को सदन में उपस्थित रहने और कटौती प्रस्ताव का समर्थन करने का व्हिप भी जारी कर दिया है.

हालांकि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा है कि सरकार के पास पर्याप्त बहुमत है और वह विपक्ष के कटौती प्रस्ताव का सामना करने को तैयार हैं.

प्रस्ताव

लोकसभा में विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज ने पत्रकारों से कहा, "हम सरकार की नीतियों को नामंजूर करते हुए डीज़ल और पेट्रोल की कीमतों में बढ़ोत्तरी के ख़िलाफ़ कटौती प्रस्ताव ला रहे हैं. साथ ही हम खाद की कीमतों में बढ़ोत्तरी के ख़िलाफ़ सांकेतिक कटौती प्रस्ताव पेश करेंगे."

सुषमा स्वराज ने कहा कि भाजपा ने लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार से कटौती प्रस्तावों पर मत विभाजन कराने के लिए कहा है.

उन्होंने यूपीए सरकार को चुनौती दी कि यदि उसे बहुमत का यकीन है तो उसे मत विभाजन पर आपत्ति नहीं होनी चाहिए.

इस कटौती प्रस्ताव को एनडीए के घटक दलों के अलावा वामपंथी पार्टियों और सरकार का बाहर से साथ दे रहे कुछ दलों का भी समर्थन हासिल है.

समाजवादी पार्टी और वामदलों ने भी पेट्रोलियम और खाद्य पदार्थों की बढ़ती क़ीमतों के ख़िलाफ़ सदन में सरकार को घेरने के मामले में एकमत हैं.

हालांकि मंगलवार को भाजपा को यह लगने लगा है कि समाजवादी पार्टी और राष्ट्रीय जनता दल की रुचि कटौती प्रस्ताव से अधिक महंगाई के मु्द्दे पर भारत बंद में अधिक है.

वैसे दोनों दलों ने अभी तक कटौती प्रस्ताव पर किसी नए रूख़ के संकेत नहीं दिए हैं.

विपक्ष एकजुट

लोकसभा में समाजवादी पार्टी के मुख्य सचेतक शैलेंद्र कुमार का कहना है कि उनकी पार्टी ने व्हिप तो नहीं जारी किया है लेकिन सदन में उसके सभी सांसद मौजूद रहेंगे.

वहीं कांग्रेस पार्टी विपक्ष के कटौती प्रस्ताव से बेफिक्र है और पार्टी नेताओं का कहना है कि सरकार इसका सामना करने के लिए तैयार है.

कांग्रेस प्रवक्ता मनीष तिवारी का कहना है कि सरकार को कोई ख़तरा नहीं है.

उनका कहना था कि अहम सवाल ये है कि तमाम विषम परिस्थितियों के बावजूद देश की अर्थव्यवस्था पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं हुआ. कटौती प्रस्ताव लाना अवसरवादी राजनीति का उदाहरण है.

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने भी कहा,''हम जीत के प्रति आश्वस्त हैं. हमें आशा है कि समान विचारधारा के दल हमारे साथ आएंगे.''

संख्या लिहाज़ से देखा जाए तो ये सही भी लगता है कि सरकार को फ़िलहाल कोई ख़तरा नहीं है.

लेकिन विपक्ष का कहना है कि ये सरकार के लिए ख़ुद शर्म की बात है कि एक साल के भीतर उसे कटौती प्रस्ताव का सामना करना पड़ रहा है.

कटौती प्रस्ताव से सरकार के अस्तित्व पर कोई ख़तरा भले ही न हो लेकिन इस मुद्दे पर पूरे विपक्ष का एक साथ खड़े होना उसके लिए परेशानी का सबब ज़रूर है वो भी उस वक़्त जबकि सदन के भीतर आईपीएल और फ़ोन टैपिंग जैसे मुद्दे पर विपक्ष ने उसे पहले से ही घेर रखा है.

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