'ग़लती' से वोट डाला, सोरेन सरकार अल्पमत में आई

शिबू सोरेन
Image caption झारखंड को पिछले आठ साल में कई बार राजनीतिक अस्थिरता का सामना करना पड़ा है

झारखंड मुक्ति मोर्चा के नेतृत्व में झारखंड की गठबंधन सरकार अल्पमत में आ गई है. मुख्य सहयोगी भारतीय जनता पार्टी ने सरकार से समर्थन वापसी की घोषणा कर दी है.

झारखंड के मुख्यमंत्री शिबू सोरेन ने मंगलवार को भारतीय जनता पार्टी के कटौती प्रस्ताव के ख़िलाफ़ मतदान किया था.

ये अलग बात है कि सोरेन ने दिल्ली से रांची जाने से पहले फिर ये भी कह दिया कि उन्होंने ग़लती से अपना मत कांग्रेस के पक्ष में डाल दिया था.

शिबू सोरेन के इस क़दम को गठबंधन धर्म के ख़िलाफ़ ठहराते हुए भाजपा की संसदीय समिति ने झारखंड सरकार से समर्थन वापसी का फ़ैसला किया है.

संसदीय समिति की बैठक के बाद भाजपा नेता अनंत कुमार ने कहा, "संसदीय समिति ने कटौती प्रस्ताव के बाद की स्थिति का जायज़ा लिया. झारखंड सरकार के मुख्यमंत्री शिबू सोरेन, जो कि भाजपा के समर्थन से मुख्यमंत्री हैं, उन्होंने कटौती प्रस्ताव के ख़िलाफ़ वोट डाला, जिसे संज्ञान में लेते हुए संसदीय समिति ने ये तय किया है कि शिबू सोरेन को दिया जा रहा समर्थन वापस लिया जाए."

अनंत कुमार का यह भी कहना था कि झारखंड सरकार के उप-मुख्यमंत्री और भाजपा नेता रघुवीर दास बुधवार शाम तक समर्थन वापसी का पत्र राज्यपाल एमओएच फ़ारूक़ को सौंप देगे.

पिछले साल झारखंड में विधानसभा चुनाव में किसी भी पार्टी को बहुमत नहीं मिला था.

झारखंड की 81 सदस्यों वाली विधान सभा में भाजपा के 18 , कांग्रेस के 14, झारखंड मुक्ति मोर्चा के 18, झारखंड विकास मोर्चा के 11, राष्ट्रीय जनता दल के 5, जनता दल यूनाइटेड के 2 और अन्य के 13 सदस्य हैं.

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