राजा ने कहा, घोटाला नहीं हुआ

Image caption राजा कहते रहे हैं कि पूरी प्रक्रिया प्रधानमंत्री कार्यालय की जानकारी में रही है

मोबाइल फ़ोन के टू-जी स्पेक्ट्रम के लाइसेंसों के आवंटन में कथित घोटाले पर विपक्ष का वार झेल रहे दूरसंचार मंत्री ए राजा ने सभी आरोपों से इनकार किया है.

बुधवार को विपक्ष ने संसद में ए राजा के इस्तीफ़े की मांग करते हुए आरोप लगाया था कि उन्होंने कार्पोरेट गुट की नुमाइंदगी कर रही एक महिला के साथ मिलकर लाइसेंसों का आवंटन किया.

विपक्ष का कहना है कि 2008 में जिस तरह से लाइसेंस का आवंटन हुआ उससे सरकार को 60,000 करोड़ का नुक़सान हुआ क्योंकि ये आवंटन कुल 1600 करोड़ के नौ अलग अलग लाइसेंसों के माध्यम से हुआ.

विपक्ष का कहना है कि अगर स्पेक्ट्रम की बोली लगाई गई होती तो सरकार को कहीं ज़्यादा आमदनी हुई होती. आरोप ये भी है कि लाइसेंस पुराने रेट पर जारी किए गए.

गुरुवार को राज्यसभा में ए राजा ने सफ़ाई देते हुए कहा कि आवंटन में पूरी पारदर्शिता बरती गई और उनके पास छिपाने को कुछ भी नहीं है.

ए राजा और और उनकी पार्टी डीएमके यूपीए गठबंधन में कांग्रेस एक अहम साझेदार हैं और सीबीआई इस समय टू-जी स्पेक्ट्रम के आवंटन की जांच कर रही है.

टू-जी स्पेक्ट्रम या सेकंड जेनरेशन स्पेक्ट्रम मोबाइल फ़ोनों में बेहतर वायरलेस तकनीक के लिए इस्तेमाल होती है.

दोहरी नीति

राजा पर सबसे तीखा प्रहार कर रही हैं उनके राज्य की प्रतिद्वदी पार्टी एआईएडीएमके की प्रमुख जयललिता.

उन्होंने इस मामले की तुलना शशि थरूर के मामले से करते हुए कहा कि कांग्रेस दोहरी नीति अपना रही है. उधर कांग्रेस के प्रवक्ता मनीष तिवारी इस मामले से बचते बचाते निकल गए.

उन्होंने कहा कि ये मामला या तो मंत्रालय का है या फिर जांच एजेंसी का और वो इसपर टिप्पणी नहीं करना चाहेंगे.

ए राजा पहले भी कह चुके हैं कि स्पैक्ट्रम आवंटन की पूरी प्रक्रिया प्रधानमंत्री कार्यालय की जानकारी में थी और इसमें घोटाले जैसी कोई बात नहीं है.

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