अजमेर धमाके में एक गिरफ़्तारी

अजमेर ब्लास्ट (फ़ाइल फ़ोटो)
Image caption अजमेर की दरगाह में हुए धमाके में कई लोग घायल हुए थे जबकी तीन की मृत्यु हो गई थी

राजस्थान के अजमेर में तीन साल पहले महान सूफ़ी संत ख़्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती की दरगाह में हुए बम विस्फोट के सिलसिले में एक हिंदू संगठन के सदस्य को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया है.

दरगाह में हुए बम धमाकों में तीन लोगों की मौत हो गई थी और 15 से ज़्यादा लोग गंभीर रूप से घायल हो गए थे.

सरकारी सूत्रों ने बीबीसी को बताया कि अजमेर के देवेंद्र नामक व्यक्ति को हिरासत में लिया गया है. देवेंद्र अजमेर के मूल निवासी हैं.

देवेंद्र का परिवार अजमेर में ही रहता है. लिहाज़ा वो अक्सर अपने परिवार से मिलने झारखंड से आते-जाते रहे हैं. पुलिस उन पर पिछले तीन महीनों से लगातार नज़र रखे हुई थी.

सूत्रों ने बीबीसी को बताया कि देवेंद्र एक हिंदू संगठन के सक्रिय कार्यकर्ता हैं. सांप्रदायिक सदभाव के केंद्र इस दरगाह में 11 अक्तूबर 2007 की शाम बम विस्फोट हुआ और मौक़े पर ही दो लोगो ने दम तोड़ दिया जबकि 15 लोग घायल हो गए थे.

इनमें से एक घायल की बाद में मौत हो गई थी.

शक की सूई

Image caption पुलिस को मिली जानकारी के अनुसार देवेंद्र झारखंड में आपराधिक गतिविधियों में शामिल था.

देवेंद्र गुप्ता से गहनता से पूछताछ चल रही है. राजस्थान के गृह मंत्री शांति धारीवाल ने भी इस बात की पुष्टि की है.

देवेंद्र पिछले कई वर्षों से कभी मध्य प्रदेश के इंदौर तो कभी झारखण्ड और बिहार से आता जाता रहा है. शुरूआती जानकारी के अनुसार हाल के वर्षों में वो झारखण्ड में सक्रिय रहा है.

पुलिस को उसके अजमेर ब्लास्ट से जुड़े होने का तब शक हुआ जब उन्हें घटना के जगह से एक मोबाइल सिम कार्ड मिला, जिसका संबंध झारखण्ड से निकला. ये सिम कार्ड नकली पहचान के जरिये झारखण्ड के जामतारा से ख़रीदा गया था. पुलिस को लगता है कि देवेंद्र के पास दूसरा सिम कार्ड था जो ग़लत पहचान से पश्चिमी बंगाल से खरीदा गया होगा.

पुलिस अब इन्हीं तथ्यों को देवेंद्र से सत्यापित करना चाहती है.

धार्मिक सदभाव

Image caption अजमेर में स्थित ख़्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती की दरगाह में सभी धर्म के लोग आते हैं

ये दरगाह सदियों से दुनिया को धार्मिक सदभाव का संदेश देती आ रही है. ये वो स्थान है जहाँ क्या हिंदू और क्या मुसलमान, सभी हाथ उठाकर भाईचारे के लिए दुआ करते रहे है.

लेकिन ये पहला मौक़ा था जब दरगाह ने हिंसा का मंजर देखा. शुरू में शक की सुई इस्लामिक चरमपंथी संगठनों पर घूमती रही.

लेकिन बाद में मालेगाँव विस्फोट के बाद पुलिस ने हिंदू चरमपंथी संगठनों पर भी नज़र रखना शुरू किया.

मालेगाँव विस्फोट के बाद राजस्थान पुलिस ने अपनी टीम मुंबई भी भेजी थी. जानकर सूत्रों ने बताया कि हिरासत में लिए गए व्यक्ति से पूछताछ की जा रही है. पुलिस अभी इस पूरे मामले में ख़ामोश है.

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