विकिरण मामले में जांच के आदेश

रीसाइक्लिंग
Image caption कोबाल्ट-60 के विकिरण (रेडिएशन) की घटना आठ अप्रैल को घटी थी,

दिल्ली में रेडियोधर्मी पदार्थ से प्रभावित लोगों से दिल्ली विश्वविद्यालय ने माफ़ी मांगी है और जांच के आदेश दिए हैं.

उल्लेखनीय है कि पिछले दिनों दिल्ली के मायापुरी इलाके़ में कबाड़ से रेडियोधर्मी कोबाल्ट-60 मिला था और इसके कारण एक व्यक्ति की मौत हो गई थी.

पुलिस को बुधवार को बताया कि मायापुरी के व्यापारियों ने दिल्ली विश्वविद्यालय के रसायन शास्त्र लेबोरेटरी के उपकरणों की नीलामी के दौरान एक ऐसा उपकरण खरीदा था जिसमें रेडियोधर्मी कोबाल्ट 60 था.

हालांकि व्यापारियों को कोबाल्ट 60 के बारे में कोई जानकारी नहीं थी.

अब दिल्ली विश्वविद्यालय के अधिकारियों का कहना है कि उन्होंने इस बात की जांच के आदेश दिए हैं कि विश्वविद्यालय ने रेडियोधर्मी पदार्थ को कचरे के तौर कैसे बेच दिया.

'कार्रवाई होगी'

उधर मुंबई स्थित परमाणु ऊर्जा नियामक बोर्ड का कहना है कि जांच के बाद अगर दिल्ली विश्वविद्यालय की ग़लती निकली तो उसके ख़िलाफ़ कार्रवाई भी हो सकती है.

हालांकि दिल्ली विश्वविद्यालय के उपकुलपति दीपक पेंटल ने घटना पर खेद जताया है और कहा है कि जो घटना घटी है विश्वविद्यालय उसकी नैतिक ज़िम्मेदारी स्वीकार करता है.

जांच के बारे में उनका कहना था,"परमाणु ऊर्जा नियामक बोर्ड के अधिकारी मामले की जांच कर रहे हैं. विश्वविद्यालय अपनी ओर से भी भाभा परमाणु अनुशंधान केंद्र की मदद से जांच कर रहा है."

दीपक पेंटल ने कहा है विश्वविद्यालय पीड़ितों को अपनी ओर से मुआवाज़ देगा.

बुधवार को पुलिस ने बताया था कि विश्वविद्यालय के रसायन विभाग ने छात्रों के शोध के लिए कनाडा से 1970 में गामा इरैडिएटर मशीन ख़रीदी थी, जो वर्ष 1980 से इस्तेमाल में नहीं थी और उसे फ़रवरी में कचरे की नीलामी में बेचा गया था.

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