फर्क़ चार पहियों का

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मात्र चार पहिए ज़िदगी की गाड़ी को कैसे बदल सकते हैं इसका एहसास सिंगूर और श्रीपेरमबदूर में होता है. एक जगह ज़िदगी इठला रही है, दूसरी जगह कुछ लोगों को रूला रही है.

श्रीपेरंबदूर भारत में कार बनानेवाली फ़ैक्ट्रियों का गढ़ है और ठीक हाइवे के सामने बनी ह्यूंडाई कार फ़ैक्ट्री वहां आम लोगों के लिए एक अच्छी ख़बर बनी हुई है.

वहीं कोलकाता से कुछ ही दूर, सिंगूर में हाइवे पर ही बनी नैनो की वीरान पड़ी फ़ैक्ट्री अब लोगों के मन में टीस पैदा कर रही है. राजनीतिक विवाद के बाद टाटा मोटर्स वहां फ़ैक्ट्री लगाने के बाद राज्य छोड़कर चली गई है. जिन किसानों की ज़मीन के लिए वहां संघर्ष हुआ, वो ज़मीन अभी भी कांटेदार तारों के पीछे क़ैद है और जिस नौकरी की उम्मीद थी कार फ़ैक्ट्री के आने से वो अब गुजरात जा चुकी है.

सिंगूर और श्रीपेरंबदूर की ज़िदगी पर बीबीसी संवाददाता ब्रजेश उपाध्याय की एक विशेष वीडियो रिपोर्ट

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