गूजरों ने आंदोलन ख़त्म किया

गूजर आंदोलन
Image caption गूजर अपने समुदाय के लिए आरक्षण की माँग को लेकर दो साल से आंदोलनरत हैं.

राजस्थान में आंदोलनरत गूजर समुदाय और सरकार के बीच समझौते के साथ ही गूजर नेता किरोड़ी सिंह बैंसला ने आंदोलन ख़त्म करने की घोषणा की है.

उनके इस एलान के साथ ही राज्य भर में कई स्थानों पर पड़ाव डाले गूजर समुदाय के लोग अपने-अपने शहरों या गांवों को लौटने लगे हैं.

बुधवार को किरोड़ी सिंह बैंसला ने अपनी मांगों के सिलसिले में राज्य के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से जयपुर में बातचीत की थी.

मुख्यमंत्री से मुलाक़ात के बाद गूजर नेता डॉक्टर रूप सिंह ने कहा, "हाँ सरकार से बातचीत के बाद हमने आंदोलन ख़त्म करने की घोषणा की है. सरकार हमें कानूनी तौर पर पांच फीसद आरक्षण देने को राज़ी है. इसके लिए हम हाई कोर्ट के निर्णय का इंतजार करेंगे"

उन्होंने कहा," सरकार ने नौकरियों में गूजर जैसे अति पिछड़े वर्गों के हितों का ध्यान रखने का वादा किया है. ये समझौता राज्य और समुदाय दोनों के हित में है."

राहत की सांस

दो दिन पहले गूजर नेताओं के आक्रामक रुख़ को देखते हुए सरकार और आम लोग चिंतित हो उठे थे.

जिसके बाद मुख्य मंत्री गहलोत अपना जैसलमेर का दौरा बीच में ही छोड़कर जयपुर पहुंचे थे और सुरक्षा उपायों का जायज़ा लिया था.

गूजर जहाँ पड़ाव डाले बैठे थे, उसके निकट से ही मुंबई और दिल्ली को जोड़ने वाला रेल मार्ग गुजरता है, लेकिन अब इस आंदोलन के ख़त्म होने की घोषणा से लोगों ने राहत की सांस ली है.

गूजर अपनी बिरादरी के लिए पांच फीसद आरक्षण की मांग रहे है. सरकार ने इसके लिए कानूनी उपाय भी किए, लेकिन अदालत ने इसपर रोक लगा दी.

इसके बाद गूजर फिर उग्र आंदोलन की चेतावनी देने लगे थे. उन्हें इस समझौते तक आने के लिए सरकार को काफ़ी मेहनत करनी पड़ी.

इससे पहले पूर्ववर्ती भारतीय जनता पार्टी की सरकार के दौरान गूजर दो बार आंदोलन कर चुके हैं, जिसमें व्यापक हिंसा हुई थी और कोई 70 लोग मारे गए थे. लेकिन इस बार जो आंदोलन हुआ, उसमें दोनों पक्षों ने शांति रखी.

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