अजमेर विस्फोट में नार्को टेस्ट का विरोध

  • 6 मई 2010
अजमेर दरगाह में धमाका (फ़ाइल फ़ोटो)
Image caption अदालत देवेंद्र की अपील पर शुक्रवार को सुनवाई करेगी.

भारत के सुप्रीम कोर्ट के नार्को टेस्ट पर आए आदेश के बाद वर्ष 2007 के अजमेर बम धमाकों के सिलसिले में गिरफ़्तार किए गए देवेंद्र गुप्त ने अपने नार्को टेस्ट का विरोध किया है.

ग्यारह अक्तूबर 2007 को राजस्थान के अजमेर शरीफ़ में हुए धमाकों में तीन लोग मारे गए थे और अनेक अन्य घायल हो गए थे.

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तहत किसी भी अभियुक्त या अन्य व्यक्ति को नार्को टेस्ट के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता और अगर कोई अपनी मर्ज़ी से इसके लिए तैयार होता है तब भी उसके बयान को सबूत के तौर पर अदालत में पेश नहीं किया जा सकता.

न्यायालय का फ़ैसला

बुधवार को सुनाए गए फ़ैसले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि दवा के प्रभाव में अभियुक्त या संदिग्ध अभियुक्त से लिए गए बयान से उसकी निजता के अधिकार का हनन होता है.

मुख्य न्यायाधीश केजी बालाकृष्णन के नेतृत्व वाले एक पीठ ने कहा कि किसी भी व्यक्ति को नार्को टेस्ट के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता और अगर कोई अपनी मर्ज़ी से इसके लिए तैयार होता है तब भी उसके बयान को सबूत के तौर पर पेश नहीं किया जा सकता.

देवेंद्र के वकील लक्ष्मीकांत शर्मा ने बीबीसी को बताया कि इसी आधार पर देवेंद्र ने अपने नार्को टेस्ट को चुनौती दी है.

उन्होंने कहा, ''हमें लगता है कि किसी व्यक्ति का बिना उसकी सहमती के नार्को टेस्ट कराया जाना संविधान में दी गई व्यक्तिगत आज़ादी का उल्लंघन है."

शर्मा ने बताया, "सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले को देखते हुए हमने देवेंद्र की ओर से एक पुनर्विचार याचिका दाखिल की है. इस पर शुक्रवार को सुनवाई होगी."

पुलिस की सक्रियता

अभियुक्त देवेंद्र गुप्त ने अजमेर की अदालत में एक अर्जी दाख़िल कर उस आदेश पर पुनर्विचार करने की अपील की है जिसके तहत उनका नार्को टेस्ट कराने की अनुमति दी गई थी.

देवेंद्र अभी पुलिस हिरासत में हैं और राजस्थान पुलिस का आतंकवाद विरोधी दस्ता उनसे पूछताछ कर रहा है.

राजस्थान पुलिस ने पिछले दिनों देवेंद्र को उस समय गिरफ़्तार किया था जब वे अपनी बीमार माँ पुष्पा से मिलने अजमेर आए हुए थे.

पुलिस ने दवेंद्र के अलावा मध्य प्रदेश के माऊ से चंद्रशेखर नाम के एक व्यक्ति को भी गिरफ़्तार किया है. पुलिस ने माऊ के ही विष्णु पाटीदार को भी पूछ्ताछ के लिए हिरासत में लिया था, उन्हें बाद रिहा कर दिया गया.

राजस्थान के गृह मंत्री शांति धारीवाल ने बीबीसी से बातचीत में आरोप लगाया कि इन धमाकों के तार मालेगांव और हैदराबाद के धमाकों से जुड़े हैं.

उन्होंने बताया कि अजमेर धमाकों में एक प्रमुख हिंदू संगठन का हाथ होने की बात सामने आ रही है. पुलिस को अभी कुछ और लोगों की तलाश है जो कथित रूप से इन धमाको में शामिल रहे हैं.

धारीवाल ने बताया कि पुलिस ने इन लोगों की गिरफ़्तारी के लिए अपनी टीमें विभिन राज्यों में भेजी हैं. वहीं हिंदू संगठनों ने धारीवाल के इन आरोपों को ग़लत बताया है.

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