अच्छी जगह नहीं है भारत

  • 9 मई 2010
महिलाएं (फ़ाइल फ़ोटो)
Image caption माताओं की सेहत के मामले में भारत का स्थान संघर्षरत अफ्रीकी देशों से भी खराब है

एक ऐसे समय जब पूरी दुनिया मदर्स डे मना रही है, यह विडम्बना ही है कि भारत में जन्म देने वाली माताओं की स्थिति ठीक नहीं है.

माताओं की सेहत पर 77 विभिन्न देशों की स्थिति बताने वाली सूची में भारत का स्थान 73वाँ है.

यह रिपोर्ट बच्चों के अधिकारों के लिए काम करने वाले संगठन 'सेव द चिल्ड्रेन' ने तैयार किया है. इस रिपोर्ट को मध्य आय वाले देशों में माताओं की सेहत के आधार पर तैयार किया गया है.

'स्टेट ऑफ द वर्ल्ड्स मदर्स 2010' नामक इस रिपोर्ट में भारत का स्थान अफ्रीका के संघर्षरत देशों कीनिया और कांगो से भी नीचे है.

मदर्स इंडेक्स रैंकिंग में क्यूबा सबसे पहले स्थान पर है.

इसके बाद का स्थान इसरायल, अर्जेंटीना, बारबाडोस, दक्षिण कोरिया, साइप्रस, उरूग्वे, कज़ाख़स्तान, बहामास और मंगोलिया का है.

भारत के पड़ोसी देशों में चीन 18वें और श्रीलंका 40वें स्थान पर है. वहीं पाकिस्तान का स्थान भारत से भी पीछे 75वाँ है. बांग्लादेश का स्थान 40 सबसे कम विकसित देशों में 14वां है.

रिपोर्ट में कुल 166 देशों का विश्लेषण किया गया है जिसमें स्वीडन का स्थान सबसे पहला है जबकि अफ़ग़ानिस्तान सबसे निचले पायदान पर है.

प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों की कमी

रिपोर्ट में कस्बा और ग्रामीण इलाकों में प्रशिक्षित स्वास्थ्य कर्मचारियों की कमी को उजागर किया गया है.

भारत में खराब स्वास्थ्य सेवा प्रणाली की यह एक खास वजह है. देश की एक बड़ी आबादी कस्बाई और ग्रामीण इलाकों में रहती है.

रिपोर्ट का मानना है कि भारत में 74,000 मान्यता प्राप्त सामाजिक स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं की कमी है जबकि सहायक नर्स या मिडवाइफ़ के मामले में यह आंकड़ा 21,066 है.

भारत में सरकारी मानदंडों के मुताबिक़ हर एक हज़ार की आबादी पर एक स्वास्थ्य कार्यकर्ता होने चाहिए. वहीं, मैदानी इलाकों में हर पाँच हज़ार की आबादी और गांवों में हर तीन हज़ार की आबादी पर एक नर्स होनी चाहिए.

मुहिम का हिस्सा बनें

सेव द चिल्ड्रेन में डॉयरेक्टर ऑफ एडवोकेसी शिरीन वकील मिलर ने बताया कि हालांकि भारत में राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन में महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को प्राथमिकता दी गई है. इसके बावजूद इन कार्यकर्ताओं की संख्या और इनके लिए ज़रूरी प्रशिक्षण की भारी कमी है.

उन्होंने कहा, "हमें स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं की कमी को पूरा करना है. महिलाओं को बाकी महिलाओं और उनके बच्चों के जीवन को बचाने की मुहिम का हिस्सा बनना है."

उन्होंने कहा कि महिलाओं की सेहत उनके शैक्षिक और सामाजिक-आर्थिक स्थिति से सीधे तौर पर जुड़ी है.

भारत में प्रसव के समय माताओं की मृत्यु दर घटने के बावजूद हर साल हज़ारों की संख्या में महिलाओं की मौत हो रही हैं. इसकी वजह यह है कि इनमें से ज्यादातर को बुनियादी स्वास्थ्य सेवा सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं. और अगर उपलब्ध हैं तो उनकी गुणवत्ता ख़राब दर्जे की है.

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