हमले में पुलिसकर्मी की मौत

  • 15 मई 2010
2007 में मक्का मस्जिद में विस्फोट और फ़ायरिंग के बाद का एक दृश्य
Image caption 2007 में मक्का मस्जिद में विस्फोट और फ़ायरिंग के बाद का एक दृश्य

हैदराबाद के पुराने शहर में एक संदिग्ध आतंकवादी हमले में एक पुलिसकर्मी की मौत के बाद तनाव फैल गया है. इसके बाद से पुलिस तीन अज्ञात हमलावरों को ढूंढ़ रही है.

यह हमला शुक्रवार को शाम 4 बजे शाह अलीबंद इलाक़े में हुआ.

हैदराबाद के पुलिस आयुक्त अब्दुल क़य्यूम ख़ान ने बताया कि एक स्कूटर पर सवार तीन नक़ाबधारी व्यक्तियों ने ड्यूटी पर तैनात दो पुलिसकर्मियों पर फ़ायरिंग कर दी.

इस फ़ायरिंग में एक पुलिसकर्मी यू रमेश की मृत्यु हो गई. पुलिस आयुक्त ख़ान ने कहा कि इस घटना का संबंध, ऐसा लगता है कि मक्का मस्जिद में हुए विस्फोट की तीसरी बरसी से है जो 18 मई को पड़ती है.

उनका कहना था कि पिछले साल भी पुराने शहर में 18 मई को ही दो पुलिसकर्मियों पर गोलीबारी हुई थी जिसमें एक पुलिसकर्मी की मौत हो गई थी. उस समय हमला करने वालों ने एक पत्र छोड़ा था जिसमें कहा गया था कि यह हमला 18 मई, 2007 को मस्जिद में विस्फोट के बाद मुसलमानों की भीड़ पर पुलिस फ़ायरिंग का बदला लेने के लिए किया गया है. उस पत्र में धमकी भी दी गई थी कि घटना की हर बरसी पर पुलिस को इसी तरह से निशाना बनाया जाता रहेगा.

उल्लेखनीय है कि मक्का मस्जिद में जुम्मे की नमाज़ के दौरान हुए विस्फोट में छह लोगों की मौत हो गई थी और जब मुसलमान उत्तेजित होकर बाहर निकले तो पुलिस ने उन पर गोली चला दी थी जिसमें नौ लोगों की मौत हो गई थी.

जहाँ पुलिस का दावा था कि उसने हिंसा को रोकने के लिए गोली चलाई, वहीं मुसलमानों का आरोप था कि पुलिस ने उन्हें जान बूझकर निशाना बनाया. सरकार ने फ़ायरिंग की अदालती जाँच के लिए जस्टिस भास्कर राव के नेतृत्व में एक आयोग बिठाया लेकिन अब तक इस आयोग ने रिपोर्ट नहीं दी है.

ज़िम्मेदारी

Image caption ख़ुफ़िया एजेंसियों ने हमले की चेतावनी पहले ही दे दी थी

शुक्रवार को हुए हमले के बाद कुछ समाचार संगठनों को उर्दू में लिखा एक पत्र मिला है जिसमें इस हमले की ज़िम्मेदारी स्वीकार की गई है.

तहरीक गलबा ए इस्लाम संगठन की ओर से भेजे गए इस पत्र में कहा गया है कि मक्का मस्जिद में हुए विस्फोट के बाद हुई फ़ायरिंग का बदला लेने के लिए यह हमला किया गया है. इसमें कहा गया है कि जब तक फ़ायरिंग के लिए ज़िम्मेदार लोगों को सज़ा नहीं दी जाती पुलिस पर ऐसे हमले होते रहेंगे. गत वर्ष के हमले की तरह शुक्रवार की घटना में भी एक लापता चरमपंथी विक़रुद्दीन अहमद उर्फ़ अहमद ख़ान का नाम सामने आया है.

पुलिस का कहना है कि उस का संबंध इंडियन मुजाहिदीन और हरकतुल जिहाद ए इस्लामी जैसे संगठनों से है. इससे पहले उस पर दिसंबर, 2008 में पुलिस के साथ हुई फ़ायरिंग की घटना में लिप्त होने का आरोप है, जिसमें दो पुलिसकर्मी घायल हो गए थे लेकिन पुलिस अब तक उसे पकड़ नहीं सकी है.

भीड़ भाड़ वाले इलाक़े में हुई घटना को लेकर लोगों में आश्चर्य है क्योंकि गुप्तचर विभाग ने हमलों की चेतावनी दी थी और इसके बाद से पिछले दो-तीन सप्ताह से पुलिस को सतर्कता बरतने को कहा गया था.

पुलिस ने बड़े पैमाने पर तलाशी अभियान भी चलाया था, जिसमें ज़िया उल हक़ नाम के एक व्यक्ति को गिरफ़्तार किया गया था. पुलिस का कहना है कि वह लश्करे तैबा का एजेंट था और उसने पाकिस्तान में प्रशिक्षण लिया था.

पुलिस ने आरोप लगाया है कि वह हैदराबाद में हमले करने की योजना बना रहा था.

यह हमला ऐसे समय में हुआ है जब मक्का मस्जिद पर हुए विस्फोट के मामले में सीबीआई की जाँच ने नई रोशनी डाली है.

सीबीआई ने दावा किया है कि राजस्थान की अजमेर दरगाह में हुए विस्फोट में जिन हिंदू चरमपंथियों को गिरफ़्तार किया गया है उनका संबंध मक्का मस्जिद विस्फोट से भी हो सकता है.

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