मणिपुर में विमान से सप्लाई की योजना

  • 14 मई 2010
मणिपुर में सप्लाई की किल्लत

पिछले ग्यारह दिनों से नागा गुटों ने सड़कों और राजमार्गों की नाकेबंदी की हुई है जिसके चलते मणिपुर में खाद्य पदार्थ और आवश्यक सामग्री की किल्लत हो गई है. इससे निपटने के लिए मणिपुर सरकार सामान हवाई मार्ग और दूसरे राजमार्गों से लाने की योजना बना रही है.

सड़कों की नाकेबंदी की वजह से पिछले कई दिनों से राज्य में आवश्यक सामग्री नहीं पहुंच पा रही है.काला बाज़ारी के चलते ईंधन की कीमतें आसमान छू रही हैं.

अस्पतालों में ऑक्सीज़न और ज़रूरी दवाइयों की बेहद कमी बताई जा रही है.

मणिपुर सरकार के प्रवक्ता और युवा मंत्री बीरेन ने बीबीसी को बताया है कि सरकार ओक्सीज़न और दवाइयों को हवाई मार्ग से लाने की सोच रही है.

वहीं खाद्य सामग्री के लिए राष्ट्रीय राजमार्ग 153 का इस्तेमाल करने पर भी सरकार सोच रही है. यह राजमार्ग आयज़वाल से सिलचर होते हुए मणिपुर में आता है हालांकि यह काफ़ी लंबा रास्ता है.

गतिरोध

नागा गुटों और मणिपुर सरकार के बीच नागा नेता मुइवा की मणिपुर में अपने घर आने के मु्द्दे पर विवाद का कोई हल फ़िलहाल निकलता नहीं दिखता.

मणिपुर सरकार के प्रवक्ता बीरेन ने कहा है कि वो विवाद को सुलझाने के लिए नागा नेताओं से संपर्क कर रहे हैं मगर उनकी तरफ़ से कोई जवाब नहीं आया है.

एनएससीएन यानी नेशनल सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ़ नागालैंड के महासचिव मुइवा बृहत नागालैंड की मांग कर रहे हैं.

बृहत नागालैंड में वो मणिपुर और असम के कुछ हिस्सों को मिलाना चाहते हैं जिसका विरोध हो रहा है.

मुइवा लगभग चार दशकों बाद मणिपुर में अपने पैतृक गांव सोमदाल जाना चाहते हैं.इस दौरान वे मणिपुर के नागा इलाकों में रैलियों को भी संबोधित करना चाहते हैं.

मणिपुर सरकार के प्रवक्ता ने कहा है कि अगर मुइवा अपने पैतृक गांव आना चाहें तो उनका स्वागत है लेकिन उन्हें रैलियों को संबोधित करने की इजाज़त नहीं दी जा सकती.

मणिपुर के इस बयान में एक बदलाव यह देखा जा सकता है कि पहले मणिपुर सरकार यह कह रही थी कि जब तक मुइवा बृहत नागालैंड की मांग छोड़ नहीं देते वो मणिपुर में नहीं आसकते.

एनएससीएन के प्रवक्ता वी.एस. अटेम ने कहा है कि मुइवा नागाओं के नेता हैं और जहां भी जाएंगे नागा लोगों की आकांक्षाओं की बात ज़रूर करेंगे.

उन्होंने कहा कि भारत की केंद्र सरकार इस बारे में अपने वादे से पलट रही है.उनका कहना है कि भारत सरकार ने मुइवा के मणिपुर में अपने पैतृक गांव का दौरा करने के प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया था लेकिन अब वो पीछे हट रही है.

उनका कहना था कि मणिपुर सरकार केंद्र सरकार के निर्देशों के बाहर कैसे हो सकती है.

मणिपुर के इस संकट को सुलझाने के लिए इसी सप्ताह केंद्रीय गृह सचिव जी. के. पिल्लै ने नागा और मणिपुरी नेताओं के साथ बात की है.

दोनों ही पक्ष पीछे हटने को तैयार नहीं हैं. एनएससीएन के प्रवक्ता वीएस एटेम ने स्वीकार किया है कि उनके वार्ताकार इस समस्या के समाधान के लिए केंद्र सरकार के साथ संपर्क में हैं.

विवाद

मुइवा अलगाववादी गुट नेशनल सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ़ नागालैंड के महासचिव हैं.नागा समस्या को सुलझाने के लिए मुइवा पिछले 13 सालों से भारत सरकार के साथ बात कर रहे हैं.

लेकिन छह दशक पुरानी नागा समस्या का हल फिलहाल नज़र नहीं आ रहा. दरअसल मुइवा की माँग है कि मणिपुर, असम और अरूणाचल प्रदेश के नागा-बहुल इलाक़ों को वर्तमान नागालैंड में मिलाकर ग्रेटर नागालैंड बनाया जाए.

इन राज्यों में नागा गुट ग्रेटर नागालैंड के लिए अभियान छेड़े हुए हैं, ख़ासकर मणिपुर में.

नागा गुटों की नाकेबंदी के कारण मणिपुर-नागालैंड सीमा पर हज़ारों ट्रक अटके पड़े हैं.

मणिपुर सरकार का कहना है कि उसने राज्य में मुईवा के आने पर इसलिए रोक लगाई क्योंकि वो नागा इलाक़ों में कई रैलियों को संबोधित करने वाले थे.

पर मुईवा का कहना है कि वे मणिपुर सरकार की निगरानी के तहत वहाँ नहीं जाएँगे, इबोबी सिंह इसका उलटा चाहते हैं.

नागा अलगाववादी नेता थुइंगालेंग मुईवा ने कहा है कि वे राज्य सरकार के प्रतिबंध के बावजूद मणिपुर स्थित अपने पैतृक गांव सोमदाल जाने के लिए कृतसंकल्प हैं.

एनएससीएन यानी नेशनल सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ़ नागालैंड के महासचिव मुईवा 1997 से भारत सरकार के साथ नागा समस्या के समाधान के लिए हो रही बातचीत में शामिल रहे हैं.

एनएससीएन का कहना है कि मणिपुर, असम और अरुणाचल के नागा-बहुल इलाक़ों को वर्तमान नागालैंड राज्य में मिलाकर ‘ग्रेटर नागालिम’ के निर्माण पर भारत की सहमति के बिना नागा समस्या का समाधान संभव नहीं है.

लेकिन तीनों राज्य एनएससीएन की इस मांग का पुरज़ोर विरोध करते रहे हैं. मणिपुर इसका सबसे ज़्यादा विरोध होता रहा है क्योंकि प्रस्तावित ‘नागालिम’ राज्य में मणिपुर का 60 प्रतिशत क्षेत्र चला जाएगा.

इंतज़ार

पिछले सप्ताह मणिपुर की सीमावर्ती चौकी माओ में मुइवा की यात्रा के पक्षधर नागा प्रदर्शनकारियों पर पुलिस ने गोली चलाई थी.

तब से अलगाववादी नेता थुईंगालेंग मुइवा नागालैंड-मणिपुर सीमा पर स्थित विस्वेमा गांव में अपने पैतृक निवास जाने का इंतज़ार कर रहे हैं.

मुइवा की प्रस्तावित यात्रा पर मणिपुर के विभिन्न राजनीतिक गुटों का विरोध जारी है.

उधर मणिपुर के नागा-बहुल क्षेत्रों में मुइवा की प्रस्तावित मणिपुर यात्रा के पक्ष में भी प्रदर्शन चल रहे हैं

मणिपुर के नागा गुटों ने इस महीने पांच पहाड़ी ज़िलों की स्वायत परिषदों के लिए होने वाले चुनावों का बहिष्कार करने का भी फ़ैसला किया है.

उनका आरोप है कि नई ज़िला परिषदें स्वायत्त संस्थाओं के आर्थिक अधिकारों का हनन करेंगी. मणिपुर सरकार ने इन आरोपों का खंडन किया है.

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