मेडिकल काउंसिल भंग, नई संस्था बनेगी

भारत सरकार
Image caption सरकार ने एमसीआई की जगह एक नई संस्था के गठन का फ़ैसला किया है

राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने उस अध्यादेश पर हस्ताक्षर कर दिए हैं जिसके अनुसार मेडिकल काउंसिल ऑफ़ इंडिया (एमसीआई) को भंग करके उसकी जगह सात डॉक्टरों के एक दल को काम संभालने को कहा गया है.

स्वास्थ्य सचिव सुजाता राव ने कहा कि डॉक्टरों का यह दल अगले एक वर्ष तक काम संभालेगा.

केंद्र सरकार ने कहा है कि वह एक नया क़ानून लाएगी जिससे कि देश में मेडिकल शिक्षा को संचालित करने के लिए एमसीआई की जगह एक संस्था का गठन किया जा सके.

उल्लेखनीय है कि एमसीआई के चेयरमैन केतन देसाई के भ्रष्टाचार के एक मामले में गिरफ़्तार होने के बाद उसे भंग करने का फ़ैसला लिया गया.

भ्रष्टाचार

केतन देसाई को गत 22 अप्रैल को घूस लेते हुए सीबीआई ने गिरफ़्तार किया था.

अधिकारियों के अनुसार पंजाब मेडिकल कॉलेज को बिना सुविधा के और छात्रों को भर्ती करने की अनुमति देने के लिए केतन देसाई ने घूस की माँग की थी.

घूस लेते हुए पकड़े जाने के बाद उन्होंने अपना इस्तीफ़ा सौंप दिया था.

एमसीआई का गठन इंडियन मेडिकल काउंसिल एक्ट के तहत 1934 में किया गया था.

इसके बाद इस क़ानून के बदले 1956 में एक नया क़ानून लाया गया था. फिर वर्ष 1964, 1993 और वर्ष 2001 में इसमें संशोधन किए गए थे.

मुख्य कार्य देश में मेडिकल शिक्षा के लिए एक समान पाठ्यक्रम तैयार करना और मेडिकल डिग्री को मान्यता देना था.

देश के सभी मेडिकल कॉलेज के लिए यह ज़रूरी होता था कि वह छात्रों की संख्या बढ़ाने या घटाने से पहले या कोई नया कोर्स शुरु करने से पहले एमसीआई से अनुमति ले.

समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार स्वास्थ्य सचिव सुजाता राव के अनुसार सरकार एमसीआई की जगह नई संस्था के गठन के लिए एक महीने के भीतर नए क़ानून का प्रारूप तैयार कर लेगी.

उनका कहना था कि नया क़ानून उन सभी समस्याओं का निराकरण कर सकेगा जिसकी वजह से एमसीआई की विश्वसनीयता ख़तरे में पड़ गई थी.

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