पूर्व उपराष्ट्रपति शेखावत का निधन

भैरों सिंह शेखावत
Image caption भैरों सिंह शेखावत बेबाक टिप्पणियों और निर्भीक क़दम उठाने के लिए जाने जाते थे

भारत के पूर्व उपराष्ट्रपति भैरों सिंह शेखावत का राजस्थान की राजधानी जयपुर में 87 वर्षी की उम्र में निधन हो गया है.

वे पिछले एक साल से बीमार चल रहे थे और पिछले दो दिन से जयपुर के सवाई मान सिंह अस्पताल में भर्ती थे. शनिवार सुबह उनकी तबीयत बिगड़ गई थी और उन्होंने सांस लेने तकलीफ़ की शिकायत की थी. इसके बाद दिल का दौरा पड़ने के कारण उनका देहांत हो गया.

उनका अंतिम संस्कार रविवार को जयपुर में होगा.

अंत्योदय योजना का श्रेय

भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता रह चुके शेखावत कई वर्ष तक राजस्थान के मुख्यमंत्री भी रहे थे. वर्ष 2002 से 2007 तक वे भारत के उपराष्ट्रपति रहे.

उन्होंने जुलाई 2007 में राष्ट्रपति पद के लिए बतौर निर्दलीय उम्मीदवार चुनाव लड़ा था लेकिन संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन की उम्मीदवार प्रतिभा पाटिल से पराजित होने के बाद तत्काल उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफ़ा दे दिया है और प्रतिभा पाटिल को जीत की बधाई दी थी.

उस समय एक बयान में उन्होंने कहा था, "मैं गरीबों और वंचित तबके के लिए काम करता रहूंगा ताकि वे अपने मौलिक अधिकारों का गरिमापूर्ण तरीके से इस्तेमाल कर सकें."

उन्हें अत्यंत ग़रीब वर्ग के लिए चलाई गई अंत्योदय योजना के लिए श्रेय दिया जाता है. इसके लिए तब के विश्व बैंक के अध्यक्ष रॉबर्ट मैक्कनमारा ने शिखावत की ख़ासी सराहना की थी और उन्हें भारत का रॉकफ़ेलर कहा था.

जब 1980 के दशक में रूप कंवर सती कांड सामने आया तो कई राजनीतिक नेताओं से अलग दिखते हुए, जनता और वोटरों के बीच अपनी लोकप्रियता की परवाह न करते हुए उन्होंने स्पष्ट तौर पर सती प्रथा के विरोध में आवाज़ बुलंद की थी.

तीन बार मुख्यमंत्री बने

भैरों सिंह शेखावत का जन्म 23 अक्तूबर 1923 को राजस्थान के सीकर ज़िले के खाचरियावास गाँव में एक किसान परिवार में हुआ था.

राजनीति में आने के कुछ वर्ष बाद ही वर्ष 1952 में वे राजस्थान विधानसभा के सदस्य बने और 1972 तक लगातार विधानसभा के सदस्य बने रहे. इस दौरान पहली बार जून 1977 में वे राजस्थान के मुख्यमंत्री बने और उनका कार्यकाल फ़रवरी 1980 तक चला.

जुलाई 1980 से दिसंबर 1989 तक वे राजस्थान विधानसभा में विपक्ष के नेता रहे.

वे मार्च 1990 में दूसरी बार राज्य के मुख्यमंत्री बने और दिसंबर 1992 तक मुख्यमंत्री रहे.

दिसंबर 1993 में वे तीसरी बार राजस्थान के मुख्यमंत्री बने और 1998 तक मुख्यमंत्री रहे. इसके बाद जनवरी 1999 से अगस्त 2002 तक वे राजस्थान विधानसभा में विपक्ष के नेता रहे.

अगस्त 2002 में वे भारत के उपराष्ट्रपति बने और जुलाई 2007 तक इस पद पर रहे.

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