'लैला' से पाँच ज़िलों में 50 हज़ार विस्थापित

मैप पर प्रभावित इलाक़ा

बंगाल की खाड़ी से आंध्र प्रदेश के पाँच तटीय ज़िलों की ओर बढ़ रहे ख़तरनाक समुद्री तूफ़ान 'लैला' के डर से 50 हज़ार लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाया गया है. राजधानी हैदराबाद में भी हाई एलर्ट है.

मुख्यमंत्री रोसैया ने स्थिति को गंभीर बताया है. उन्होंने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और आंध्र प्रदेश में विपक्ष के नेताओं के विचार-विमर्श किया है.

प्रशासन की मदद के लिए सेना को बुलाया गया है जबकि नौसेना को भी एलर्ट पर रखा गया है. पाँच ज़िलों के जिन हिस्सों पर 'लैला' का प्रकोप पड़ सकता है, वहाँ लगभग 12 लाख लोग रहते हैं.

तेज़ रफ़्तार हवाओं के कारण बिजली के खंभे और पेड़ गिर गए हैं और कम से कम 100 गाँवों को बिजली की सप्लाई बंद हो गई है. प्रशासन ने गंभीर पूर्वानुमानों को देखते हुए लगभग 800 ऐसे गाँवों की पहचान की गई है जहाँ से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाया जाना है.

तूफ़ान कितना शक्तिशाली है इसका अंदाज़ा इससे लगाया जा सकता है कि जिस क्षेत्र में इस समय तूफ़ान है उसके केंद्र में 4.5 मीटर ऊँची लहरें उठ रही हैं और हवाओं की गति लगभग 102 किलोमीटर प्रति घंटा है.

अनुमान यह है कि जिस समय तूफ़ान तट से टकराएगा, उस समय हवाओं की रफ़्तार लगभग 125 किलोमीटर प्रति घंटा होगी और लगभग तीन मीटर ऊँची समुद्री लहरें उठेंगी.

पिछले 14 सालों में सबसे ख़तरनाक माना जाने वाला तूफ़ान मछलीपटनम से 250 किलोमीटर दूर दक्षिणपूर्व में केंद्रित है और पश्चिमोत्तर की ओर बढ़ रहा है. आंध्र प्रदेश के इतिहास में सबसे विनाशकारी तूफ़ान 1977 में कृष्णा ज़िले में आया था जिसमें 10 हज़ार से ज़्यादा लोगों की मौत हो गई थी.

15 मारे गए

विशाखापत्तनम में स्थित चक्रवात चेतावनी केंद्र के निदेशक वीएलपी प्रसाद के अनुसार, "ये तूफ़ान गुरुवार सुबह मछलीपटनम और काकीनाडा के बीच तटीय इलाक़ों को पार करेगा. उस समय तटीय आंध्र प्रदेश में 125 किलोमीटर प्रति घंटा तक की गति से तेज़ हवाएँ चल सकती हैं."

इसी के साथ 25 सेंटीमीटर प्रति दिन तक तूफ़ानी बारिश हो सकती है. विशाखापत्तनम से नैलौर तक कई जगहों पर मंगलवार की रात से ही बारिश शुरु हो गई है और 65 से 75 किलो प्रति घंटा की रफ़्तार से हवाएँ चल रही हैं.

मंगलवार रात से होने वाली बारिश में आठ लोगों की मौत हो चुकी है और 19 मछुआरे लापता हैं.

मछलीपटनम में प्रशासन ने 120 राहत कैंप खोले हैं और ज़रूरी वस्तुओं का इंतज़ाम किया है.

इस स्थिति को देखते हुए इस तटीय इलाक़े की सभी बंदरगाहों पर ख़तरे का निशान सात पर यानी सबसे तीव्र तूफ़ान का संकेत दे रहा है. सभी समुद्री जहाज़ों से ज़रूरी अहतियाती क़दम उठाने के लिए कहा गया है.

पूर्वी गोदावरी ज़िले में कृष्णा-गोदावरी भूतल में स्थित प्राकृतिक गैस के कुँओं से गैस निकालने का काम रोक दिया गया है.

राज्य के मुख्यमंत्री के रोसैया ने कहा है कि नौ तटीय ज़िलों के अधिकारियों से कहा गया है कि सभी सरकारी अधिकारी प्राकृतिक आपदा से निपटने में जुट जाएँ. इसीलिए छह हेलिकॉप्टरों को भी तैयार रखा गया है. भारतीय नौसेना और थल सेना को भी सतर्क रहने को कहा गया है.

नेशनल डिसासटर रेस्पॉंस फ़ोर्स की चार कंपनियों को भी तटीय आंध्र प्रदेश के ज़िलों में तैनात किया गया है. उस इलाक़े में 36 विशेषज्ञों का दल भी पहुँच गया है.

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