तूफ़ान की आशंका,प्रशासन चौकस

  • 19 मई 2010

बंगाल की खाड़ी में उठनेवाला शक्तिशाली तूफ़ान 'लैला' तेज़ गति के साथ आंध्रप्रदेश के तट की ओर बढ़ रहा है. इसे देखते हुए प्रशासन को चौकस कर दिया गया है ताकि किसी भी स्थिति से निपटा जा सके.

ये तूफ़ान अभी विशाखापट्नम से करीब 400 किलोमीटर दूर है. आशंका जताई जा रही है कि ये तूफ़ान बुधवार रात या गुरुवार सुबह तट से टकरा सकता है.

खतरे का अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 1996 के बाद से पहली बार इतना शक्तिशाली तूफ़ान आ रहा है और इसकी गति लगातार बढ़ती जा रही है.

मौसम विभाग का कहना है कि 125 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से हवाएँ चल सकती हैं और भारी बारिश हो सकती है. मुख्यमंत्री स्वंय स्थिति पर नज़र रखे हुए हैं.

राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन बोर्ड और गृह मंत्रालय भी काम में जुटे हैं. किसी भी स्थिति से निपटने के लिए प्रशासन तैयारी कर रहा है. अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि किसी भी सूरत में लोगों की जान नहीं जानी चाहिए.

सैंकड़ों ट्रकों और बसों को तैयार रखा गया है ताकि सूचना मिलते ही लोगों को इलाक़ों से सुरक्षित जगह ले जाया जा सके. कई स्थानों पर अभी से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाने का काम शुरु हो चुका है.

प्रशासन ने किया तैयारी का दावा

25 सेंटीमीटर से भी ज़्यादा बारिश का पूर्वानुमान लगाया गया है.आँधी तूफ़ान से पेड़ और बिजली के खंभे उखड़ सकते हैं और घरों को भी नुक़सान पहुँच सकता है.

मंगलवार शाम को आंध्र प्रदेश में कई जगहों पर तूफ़ानी हवाएँ चलीं और बिजली की कड़क से साथ भारी बारिश हुई थी.

इससे कम से कम आठ लोगों की मौत हो गई जबकि मछली पकड़ने के लिए गए 19 मछुआरे लापता हैं. इनका संबंध पूर्वी गोदावरी, प्रकाशम और नेल्लोर ज़िलों से है.

कई ज़िलों में अधिकारियों की छुट्टियाँ रद्द कर दी गई हैं.मछुआरों से कहा गया है कि समुद्र में ऊंची लहरें उठ सकती हैं इसलिए वो समुद्र में न जाएँ.

राज्य सरकार के अनुरोध पर कार्रवाई करते हुए राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन ऑथारिटी और केंद्रीय गृह मंत्रालय ने आपदा प्रबंधन की चार कंपनियों को उड़ीसा और तमिलनाडु से तत्काल आंध्र प्रदेश जाने का निर्देश दिया है.

ये विशेष दल अपने साथ रबर की नावें और बचाव के अन्य उपकरण ले जाएगा.इसके अलावा सेटेलाइट फ़ोन और हैम रेडियो पर आधारित दूरसंचार व्यवस्था भी तैयार की जा रही है.

ये लगातार दूसरा वर्ष है जबकि ऐसे समय तूफ़ान आ रहा है जब मॉनसून आने का समय है. पिछले वर्ष इन्हीं दिनों समुद्री तूफ़ान आया था जिसके कारण मॉनसून के आगे बढ़ने की प्रक्रिया रुक गई थी.

विशेषज्ञों को डर है कि कहीं तूफ़ान 'लैला' के कारण मॉनसून पर प्रभाव न पड़े.

बीबीसी न्यूज़ मेकर्स

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