झारखंड में राजनीतिक असमंजस बरकरार

  • 21 मई 2010
अर्जुन मुंडा
Image caption भाजपा ने अर्जुन मुंडा को मुख्यमंत्री बनाने का फ़ैसला किया है

झारखंड में अप्रैल के आख़िरी सप्ताह में शुरु हुआ राजनीतिक असमंजस ख़त्म होने का नाम ही नहीं ले रहा है.

एक ओर भाजपा के अर्जुन मुंडा शपथ लेने की तैयारी कर रहे हैं तो दूसरी ओर मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठे शिबू सोरेन संकेत ही नहीं दे रहे कि वे कब तक इस्तीफ़ा देंगे.

उल्लेखनीय है कि लंबी राजनीतिक खींचतान के बाद आख़िर 18 मई को दोनों दलों ने एक समझौते की घोषणा की थी जिसके अनुसार कहा गया था कि दोनों दलों ने 28-28 महीने सत्ता के बँटवारे की बात कही थी.

उस समय भारतीय जनता पार्टी ने हालांकि ये संकेत दिए थे कि शिबू सोरेन 25 मई तक इस्तीफ़ा दे देंगे और अर्जुन मुंडा पहले 28 महीनों के लिए मुख्यमंत्री का पद संभालेंगे.

हालांकि झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) की ओर से तारीख़ के बारे में कोई बात नहीं की गई थी.

बीबीसी के झारखंड संवाददाता सलमान रावी के अनुसार अभी यह राजनीतिक असमंजस बरकरार है कि सत्ता का हस्तांतरण कब हो रहा है और हो भी रहा है या नहीं.

उनका कहना है कि भाजपा के भीतर भी इस समझौते को लेकर नेता एकमत नहीं हैं. असहमत नेताओं का कहना है कि शिबू सोरेन पर भरोसा करके सरकार का गठन ठीक नहीं है.

दूसरी ओर जेएमएम के भी कई विधायक भाजपा के साथ कार्यकाल बाँटने के इस विचार से असहमत हैं इसमें सीता सोरेन, साइमन मरांडी, विद्युतबरन और रामदास सोरेन शामिल हैं.

शिबू सोरेन इस समय लोकसभा के सदस्य हैं और उन्हें मुख्यमंत्री बने रहने के लिए विधानसभा का चुनाव लड़ना होगा लेकिन नियम क़ानूनों के अनुसार वे 30 जून तक बिना चुनाव लड़े मुख्यमंत्री बने रह सकते हैं.

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