भाग्यशाली हूँ कि ज़िंदा हूँ

  • 22 मई 2010

मैंगलोर हवाई अड्डे के पास दुर्घटनाग्रस्त विमान के मलबे को देखकर नहीं लगता कि इस हादसे में कोई ज़िंदा भी बच पाया होगा.

लेकिन सच यही है कि इस बड़े हादसे के बावजूद कुछ लोग किस्मत के धनी थे और उनकी जान बच गई.

शनिवार की सुबह एयर इंडिया एक्सप्रेस का विमान मैंगलोर हवाई अड्डे पर दुर्घटनाग्रस्त हो गया और खाई में गिर गया. इस हादसे में 158 लोग मारे गए हैं.

इस विमान में 160 यात्री और चालक दल के छह सदस्य सवार थे. हादसे में बचे कुछ लोग उस भयानक क्षण को याद करके सिहर उठते हैं.

हादसा

मैंगलोर के एक अस्पताल में भर्ती स्टालिन मायाकुट्टी ने पत्रकारों को बताया, "हमारा विमान स्थानीय समय के मुताबिक़ 1.15 मिनट पर दुबई से रवाना हुआ था. हमारा विमान 6.20 मिनट पर मैंगलोर हवाई अड्डे पर उतरा लेकिन दुर्घटनाग्रस्त हो गया. लैंडिंग के बाद विमान तेज़ी से हिला. पायलट ने तेज़ी से ब्रेक लगाए लेकिन विमान शायद किसी इमारत से टकराया और विमान के टुकड़े हो गए. विमान में आग लग गई. मैं और चार-पाँच अन्य लोग विमान से बाहर आ गिरे."

केरल के रहने वाले कृष्णा भी उन लोगों में थे, जो विमान के टुकड़े होने के बाद विमान से बाहर आ गिरे.

कृष्णा का कहना है कि हादसे से पहले विमान किसी चीज़ से टकराया था.

कृष्णा ने कहा, "हवाई अड्डे पर लैंडिंग के समय विमान रनवे से उतर गया और किसी चीज़ से जा टकराया. फिर विमान में आग लग गई. हमने अपने ऊपर देखा, तो विमान टुकड़े हो चुका था. मैं उसी रास्ते बाहर आ गया."

हादसे में बच गए प्रदीप को तो अपने ज़िंदा बचने का भरोसा ही नहीं हो रहा है.

उन्होंने बताया, "विमान जैसे ही ज़मीन से टकराया और उसके टुकड़े हुए, मैं किसी तरह उन टुकड़ों के बीच से निकलने में सफल रहा. दस मिनट बाद उसमें ज़बरदस्त धमाका हुआ. मुझे तो अब भी भरोसा नहीं हो रहा कि मैं ज़िंदा बच गया हूँ."

उमर फ़ारूक़ किसी तरह विमान के मलबे में से निकल पाने में सफल रहे, लेकिन उनके दोनों हाथ जल गए और पैरों में चोट भी आई.

उन्होंने बताया कि विमान रनवे से भटक गया और फिर दुर्घटनाग्रस्त हो गया. उमर फ़ारूक़ ने कहा- ये रोंटगे खड़े कर देने वाला अनुभव था. मैं भाग्यशाली हूँ कि ज़िंदा हूँ.

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