तीन मिनट में सब ख़त्म हो गया!

दुर्घटनाग्रस्त विमान
Image caption पायलट ने काफी तेजी से जहाज की लैंडिंग कराई जो दुर्घटना की बड़ी वजह बनी

विमान में सवार के पी मयन्कुट्टी उन आठ भाग्यशाली लोगों में से एक हैं जो जीवित बच गए. वे शारजाह में सेल्समैन की नौकरी करते हैं और दो महीने की छुट्टियाँ मनाने मैंगलोर आ रहे थे.

मयन्कुट्टी से हमने इस हादसे के बारे में बातचीत की. दुर्घटना की एक वजह जहाज की गलत तरीके से कराई गई लैंडिंग मानी जा रही है.

मैंगलोर हवाई अड्डे पर दुर्घटनाग्रस्त एयर इंडिया एक्सप्रेस के विमान में चालक दल के छह सदस्यों सहित 166 लोग सवार थे जिनमें 158 लोगों की मौत हो गई. सिर्फ़ आठ लोग ही जिंदा बचे जिनमें तीन की हालत गंभीर बताई जा रही है.

हवाई जहाज़ की लैंडिंग के बारे में मयन्कुट्टी कहते हैं कि जहाज़ ने बिल्कुल ठीक लैंडिंग की थी और कोई भी गड़बड़ नहीं हुई. लेकिन लैंडिंग करने के एक मिनट बाद एक झटका सा लगा और जहाज़ लैंडिंग वाली हवाई पट्टी में दौड़ते हुए रनवे के बाहर पहुँच गया.

जहाज बड़ी तेजी से लैंड कराया गया

मयन्कुट्टी बताते हैं, "मेरी सीट बीच में थी, सीट नंबर 23. मैंने खिड़की से साफ़-साफ़ देखा कि जहाज़ रनवे के बाहर था और उसके बाद किसी इमारत से टकराया भी."

उनका कहना है, "पायलट ने जहाज़ को बहुत तेज़ी से लैंड करा दिया जबकि यह धीमे होना चाहिए था. शायद इसी वजह से जहाज़ किसी इमारत से टकराया और फिर हवाई जहाज़ टूट गया. उसमें आग लग गई. इसी बीच मुझे थोड़ी जगह मिल गयी और मैं बाहर जंगल में कूद कर निकल गया."

जब उनसे पूछा गया कि क्या हवाई जहाज़ के पायलट ने तेज़ी से लैंडिंग करने के बाद जहाज़ में ब्रेक भी लगाए थे?

इसके जवाब में मयन्कुट्टी कहते हैं कि लैंडिंग करने के करीब एक मिनट के भीतर ही पायलट ने बहुत तेज़ी से ब्रेक लगाया, उसके बाद जहाज़ किसी चीज़ से टकराया और बस तीन मिनट के भीतर ही सब ख़त्म हो गया.

उन्होने कहा कि, “आज अख़बारों में पढ़ा कि पायलट ने शायद आपातकालीन टेक-आफ करने की भी कोशिश की थी, पर ऐसा कुछ भी नहीं हुआ. मैंने बहुत बार हवाई यात्रा की है लेकिन इस तरह की लैंडिंग पहली बार महसूस की.”

पूरी गलती पायलट की

मयन्कुट्टी इस विभत्स दुर्घटना के लिए पूरी गलती पायलट की मानते हैं क्योंकि उसने सही जगह पर हवाई जहाज़ को लैंड ही नहीं कराया.

तो फिर इस हादसे में मयन्कुट्टी जहाज़ से बाहर कैसे निकल सके? इस सवाल पर वे कहते हैं, “ जैसे ही जहाज़ टूट कर दो हिस्सों में हो गया, वहां पर बनी जगह से मैं बाहर कूद गया. मुझे याद है, हम चार लोग थे जो एक साथ बाहर कूदे थे.”

हादसे के बाद ही बचाव और राहत दल वहां पर पहुँच गए और इन्हें अस्पताल पहुंचा दिया गया. मयन्कुट्टी अस्पताल में अपनी देख-रेख से संतुष्ट हैं.

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