राज परिवार का विवाद बढ़ा

गायत्री देवी
Image caption पोते-पोती और सौतेले बेटे के बीच लड़ाई

जयपुर के पूर्व राजवंश की महारानी रही गायत्री देवी जीते जी धन और ऐश्वर्य की प्रतिमूर्ति मानी जाती रही. मगर उनके अवसान के बाद पूर्व राजघराने के सदस्यों में जायदाद को लेकर ऐसी जंग छिड़ी है कि एक पक्ष ने गायत्री देवी के बारे में कहा है कि वह 'लिली पूल' महल में महज बतौर किरायेदार रह रही थीं.

'लिली पूल' को लेकर स्वर्गीय गायत्री देवी के पोते देवराज और पोती लालित्या तथा सौतेले पुत्रों में स्वामित्व की लड़ाई में तल्ख़ी आ गई है.

फ्रेंच शैली में बने 'लिली पूल' में गायत्री देवी ने ज़िंदगी के कई यादगार लम्हे गुज़ारे हैं.

उनकी मौत के कोई दस माह बाद धन और सम्पति को लेकर अब उनके वारिस होने के दावा कर रहे पूर्व राज परिवार के लोग एक दुसरे के विरुद्ध कानूनी जंग लड़ रहे है.

गायत्री देवी का 29 जुलाई 2009 को 90 वर्ष की आयु में देहांत हो गया था. उनके एकमात्र पुत्र जगत सिंह का पहले ही 1997 में देहांत हो गया था.

जगत सिंह के पुत्र देवराज और पुत्री लालित्या अब 'लिली पूल' पर अपना हक़ जता रहे है, लेकिन गायत्री देवी के सौतेले पुत्र पृथ्वीराज सिंह ने उनके हक़ को अदालत में चुनौती दी है.

पृथ्वीराज सिंह प्रसिद्ध रामबाग होटल लिमिटेड के निदेशक भी है. इस होटल कंपनी ने अख़बारों में विज्ञापन देकर कहा है कि 'लिली पूल' पर रामबाग होटल का अधिकार है और 'लिली पूल' रामबाग का ही हिस्सा है.

कंपनी ने देवराज और लालित्या को 'लिली पूल' को ख़ाली करने को कहा है.

खंडन

रामबाग होटल लिमिटेड के वकील जी के गर्ग ने बीबीसी से कहा गायत्री देवी 'लिली पूल' में रहती ज़रूर थीं मगर उनकी हैसियत मालिक की नहीं एक किरायेदार की थी.

गर्ग ने कहा, ''लिली पूल उनके पास किराए पर था. इसका किराया तीन हज़ार मासिक था. इस बारे में गायत्री देवी और होटल कंपनी के बीच 1978 में क़रार हुआ था. इसकी प्रति हमारे पास मौजूद है."

उधर देवराज के वकील एम रंजन ने दावा किया है कि देवराज और लालित्या विधिवत गायत्री देवी के वारिस है और इसी नाते वो 'लिली पूल' में रह रहे है.

क्या गायत्री देवी किरायेदार के रूप में निवास कर रही थी, ये पूछे जाने पर रंजन कहते है, "ऐसी बातों में कोई सच्चाई नहीं है. दरअसल 'लिली पूल' जयुपर रियासत के तत्कालीन दिवगंत महाराजा और गायत्री देवी के पति सवाई मान सिंह ने दिया था. लिहाज़ा देवराज और लालित्या ही इसके मालिक है."

श्री रंजन कहते है जायदाद को लेकर गायत्री देवी और उनके पोते-पोती के बीच क़ानून के हिसाब से निपटारा हो गया था और इसी आधार पर स्थानीय अदालत ने उनके पक्ष में गत वर्ष उत्तराधिकार प्रमाण पत्र जारी किया था.

देवराज और लालित्या अपने सौतेले चाचा पृथ्वीराज के विरुद्ध कंपनी कानून बोर्ड में होटल बनी विरासत की सम्पतियों में अपनी हिस्सेदारी को लेकर कानूनी जंग लड़ रहे है.

देवराज का आरोप है कि उनके दिवंगत पिता के नाम इन होटलों में शेयर थे, जिन्हें काफी मात्रा में घटा दिया गया है.

पुराना विवाद

देवराज और लालित्या काफी समय तक अपनी माँ और थाई राज परिवार की सदस्य प्रियानन्दना के साथ विदेश में रहे है. प्रियानन्दना का जगत सिंह से जीते जी ही विवाद हुआ जो बाद में तलाक़ में बदल गया लेकिन देवराज और लालित्या अपनी दादी गायत्री देवी के पास आते जाते रहे.

मगर पूर्व राजपरिवार में उनके विरोधी गुट का कहना है कि जगत सिंह का अपने जीवन काल में दोनों बच्चों और प्रियनंदना से मोहभंग हो गया था और वो एक काग़ज़ छोड़ गए जिस में बच्चों को जायदाद में हिस्सा न देने की बात कही गई थी. मगर देवराज के वकील रंजन ऐसे दस्तावेज की सच्चाई पर सवाल उठाते है.

राजघरानों में सम्पति और राजसत्ता को लेकर जंग कोई नई बात नहीं है. रियासत काल में पारम्परिक हथियार, महल और मैदान इसके गवाह रहे है. मगर अब भारत आज़ाद है, लिहाज़ा अब जंग के तरीके बदल गए हैं.

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