उत्तर कोरिया रिश्ते तोड़ेगा

  • 25 मई 2010
Image caption उत्तर कोरिया अपनी जल और वायु सीमा दक्षिण कोरिया के विमानों तथा जहाज़ों के लिए बंद कर रहा है

उत्तर कोरिया ने दक्षिण कोरिया के साथ पूरी तरह के संबंध तोड़ लेने की घोषणा की है, उत्तर कोरिया की सरकारी समाचार एजेंसी ने इसकी सूचना दी है.

समाचार एजेंसी केसीएनए ने यह भी बताया है कि दोनों देश मिलकर उत्तर कोरिया में जो फैक्ट्री चला रहे थे उसमें से भी दक्षिण कोरियाई कर्मचारियों को वापस भेजा जा रहा है.

दक्षिण कोरिया के एक युद्धपोत पर पनडुब्बी से हमला करके उसे डुबोने का आरोप उत्तर कोरिया पर लगाया गया था जिसके बाद से बढ़े विवाद की परिणति इस घोषणा के रूप में हुई है.

उत्तर कोरिया ने इस आरोप से इनकार किया है कि उसने दक्षिण कोरियाई पोत को डुबोया था जिस पर सवार 46 नौसैनिक मारे गए थे.

इससे पहले दक्षिण कोरिया ने रविवार को घोषणा की थी कि वह उत्तर कोरिया के साथ व्यापारिक संबंध समाप्त करने जा रहा है.

दक्षिण कोरिया ने कहा है कि वह उत्तर कोरिया के रवैए की शिकायत संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में करना चाहता है और अंतरराष्ट्रीय बिरादरी के सामने इस पूरे मामले को पेश करना चाहता है.

मंगलवार की घोषणा में उत्तर कोरिया ने कहा है कि वह दक्षिण कोरियाई विमानों और जहाज़ों को अपनी जल तथा वायु सीमा में प्रवेश नहीं करने देगा और अपने दक्षिणी पड़ोसी से संचार संपर्क भी नहीं रखेगा.

रिश्तों में कड़वाहट

कुछ ही दिनों के भीतर दोनों पड़ोसी देशों के बीच रिश्तों में बहुत कड़वाहट आ गई है. बीबीसी के कूटनीतिक मामलों के संवाददाता का कहना है कि अब अंतरराष्ट्रीय बिरादरी के सामने चुनौती है कि वह इस टकराव को और बढ़ने से रोके.

अमरीकी विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन ने कहा है कि अमरीका और चीन को इस मामले में मिलजुलकर काम करना चाहिए, चीन की यात्रा पर गईं अमरीकी विदेश मंत्री ने कहा कि कोरियाई प्रायद्वीप में शांति बनाए रखना दुनिया के देशों की ज़िम्मेदारी है.

चीन ने सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की है और सभी पक्षों से परस्पर सहयोग का आह्वान किया है.

चीनी विदेश उप मंत्री ने कहा है कि उनका देश अमरीका तथा अन्य देशों के साथ मिलकर कोरिया की स्थिति में सुधार लाने के लिए काम करने को तैयार है.

चीन को उत्तर कोरिया की वामपंथी सरकार का हिमायती समझा जाता है जबकि दक्षिण कोरिया को अमरीका का समर्थन हासिल है इसलिए दोनों पड़ोसी देशों के बीच के तनाव को एक बड़ी कूटनीतिक चुनौती के रूप में देखा जा रहा है.

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