मोबाइल फ़ोनों ने किया कमाल

मोबाइल पर सम्मेलन
Image caption विश्व के ग्रामीण इलाकों में 75 प्रतिशत जनसंख्या तक मोबाइल सिग्नल पहुंचता है

अतरराष्ट्रीय दूरसंचार यूनियन (आईटीयू) ने कहा है कि मोबाइल फ़ोन का जिस तेज़ी से विस्तार हो रहा है उसकी वजह से आज जितने लोग एक दूसरे से जुड़े हुए हैं उतने मानव इतिहास में कभी नहीं जुड़े रहे.

हालांकि हैदराबाद में जारी विश्व दूरसंचार विकास सम्मलेन के दौरान आईटीयू ने ये भी कहा है कि एक-दूसरे के संपर्क को और अधिक लाभदायक बनाने के लिए ब्रॉडबैंड को पूरी दुनिया में फैलाने की आवश्यकता है.

सम्मेलन में विश्व भर में दूरसंचार और सूचना तकनीक की स्थिति पर एक रिपोर्ट जारी की गई जिसमें कहा गया है कि दुनिया के अनेक देश सौ प्रतिशत मोबाइल कनेक्शन की ओर बढ़ रहे हैं.

रिपोर्ट को आईटीयू ने संयुक्त राष्ट्र के कई दूसरे संस्थानों के साथ मिलकर तैयार की है.

इस रिपोर्ट में सारा ध्यान इस बात पर रखा गया है कि वर्ष 2005 में इंफ़ोर्मेशन सोसाइटी के शिखर सम्मेलन में वर्ष 2015 के लिए जो लक्ष्य तय किए गए थे उन्हें कहां तक हासिल किया जा सका है.

मोबाइल की पहुंच

रिपोर्ट के अनुसार इस समय मोबाइल फ़ोन के सिग्नल पृथ्वी के 90 प्रतिशत हिस्सों पर पहुंच रहा है, जो 2015 तक बढ़कर सौ प्रतिशत हो जाएगा. इस तरह पूरे विश्व में कहीं भी कोई भी व्यक्ति मोबाइल फ़ोन का उपयोग कर सकेगा.

दुनिया के ग्रामीण इलाकों में 75 प्रतिशत जनसंख्या तक मोबाइल सिग्नल पहुंचता है और ग्रामीण इलाकों की 50 प्रतिशत जनता इसका उपयोग करती हैं.

रिपोर्ट जारी करते हुए आईटीयू के निदेशक सामी अल-बशीर ने कहा, "आज विश्व में पांच अरब मोबाइल कनेक्शन हैं, लेकिन कुछ विकसित देशों में जितने लोग आबाद है उससे दोगुनी संख्या में वहाँ मोबाइल फो़न हैं. वर्ष 2015 तक भी विश्व की केवल 50 प्रतिशत जनसंख्या के पास ही मोबाइल फ़ोन होगा और इसे सौ प्रतिशत होने में 2020 तक का समय लगेगा."

इस रिपोर्ट में एक अहम सिफ़ारिश की गई है कि सभी देशों को 2015 तक दुनिया की आधी आबादी तक ब्रॉडबैंड नेटवर्क ले जाने के लिए तेज़ गति से क़दम उठाने चाहिए, क्योंकि ब्रॉडबैंड, मोबाइल से कहीं ज़्यादा महत्वपूर्ण है.

रिपोर्ट में कहा गाया है कि ब्रॉडबैंड के ज़रिए शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यावरण और अन्य क्षेत्रों में जानकारी का आदान-प्रदान हो सकेगा. इसमें ब्रॉडबैंड के ज़रिए स्कूलों, विश्वविद्यालयों, शोध केंद्रों और अस्पतालों को परस्पर जोड़ने पर ज़ोर दिया है.

खाई बहुत बड़ी है

Image caption पिछले साल तक विश्व की 1.7 अरब आबादी इंटरनेट का उपयोग कर रही थी

सामी अल-बशीर ने कहा है कि मोबाइल फ़ोन की संख्या में वृद्धि के बावजूद विकसित और विकासशील देशों में काफी अंतर है. उन्होंने कहा है कि इस समय अधिकतर विकसित देशों के लोग तेज़ गति वाले ब्रॉडबैंड नेटवर्क का उपयोग कर रहे हैं वहीं विकासशील देशों में यह संख्या केवल 3.5 प्रतिशत के पास है.

रिपोर्ट के अनुसार गत वर्ष तक विश्व की आबादी का 26 प्रतिशत हिस्सा यानि 1.7 अरब लोग इंटरनेट का उपयोग कर रहे थे. जहां विकसित देशों में इंटरनेट के उपभोक्ताओं की संख्या 64 प्रतिशत थी जबकि विकासशील देशों में यह संख्या 20 प्रतिशत से भी कम थी. विकासशील देशों में केवल 12 प्रतिशत घरों में इंटरनेट मौजूद है.

यूरोप और पूर्व सोवियत यूनियन में शामिल देशों में मोबाइल फ़ोन की सुविधा सौ प्रतिशत तक पहुंच गई है.

विश्व भर में 67 प्रतिशत परिवारों के पास टीवी है और इन घरों की संख्या 1.4 अरब बनती है. यूरोप, अमरीका जैसे देशों में 90 प्रतिशत, अरब देशों में 82 प्रतिशत और एशिया पेसिफिक देशों में 75 प्रतिशत घरों में टीवी है लेकिन अफ़्रीकी देशों में यह दर केवल 28 प्रतिशत है.

रिपोर्ट में कहा गया है कि जो 10 भाषाए इंटरनेट पर छाई हुई हैं उनमें हिंदी नहीं है. ये भाषाएँ हैं- अंग्रेजी, जापानी, चीनी, अरबी, स्पेनिश, फ़्रांसिसी, पोर्तुगीज़, जर्मन, रुसी और कोरियाई भाषा.

अल-बशीर ने कहा कि इस कमी को दूर करने और दूसरी भाषाओं के लोगों को ऑनलाइन पर आने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए इन भाषाओं में सामग्री उपलब्ध कराई जानी चाहिए.

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