राठौर की ज़मानत पर सुनवाई टली

रुचिका
Image caption रुचिका ने वर्ष 1993 में आत्महत्या कर ली थी

पंजाब और हरियाण हाई कोर्ट ने रुचिका गिरहोत्रा से छेड़छाड़ के मामले में सज़ा पाने वाले हरियाणा के पूर्व पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) एसपीएस राठौर की जम़ानत याचिका पर सुनवाई शुक्रवार तक स्थगित कर दी है.

मंगलवार को चंडीगढ़ की एक निचली अदालत ने एसपीएस राठौर की सज़ा छह महीने से बढ़कर डेढ़ साल कर दी थी.

अदालत के फ़ैसले के तुरंत बाद राठौर को हिरासत में ले लिया गया था और फिर उन्हें बुड़ैल की जेल में भेज दिया गया.

बुधवार को राठौर की पत्नी आभा राठौर ने अपने पति की ओर से पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट में निचली अदालत के फ़ैसले पर समीक्षा याचिका दायर की थी.

राठौर की याचिका पर सुनवाई टल जाने से फ़िलहाल उन्हें जेल ही में रहना होगा.

आभा राठौर ने अपनी याचिका में आरोप लगाया है कि निचली अदालत ने 'मीडिया के दबाव' में फ़ैसला दिया था. आभा ने अपनी अर्ज़ी में अदालत से अपील की है कि उनके पति (मुवक्किल) को ज़मानत पर रिहा कर दिया जाए, क्योंकि वो दिल की बीमारी से ग्रसित हैं.

मामला

ग़ौरतलब है कि सीबीआई की विशेष अदालत ने एसपीएस राठौर को पिछले साल दिसंबर में छह महीने की सज़ा सुनाई थी.

इस फ़ैसले को बहुत कम बताते हुए रुचिका गिरहोत्रा के परिजनों और सीबीआई दोनों ने अदालत में अलग-अलग याचिका लगाई थी जिस पर सुनवाई के बाद यह फ़ैसला सुनाया गया है.

इस फ़ैसले के ख़िलाफ़ एसपीएस राठौर ने भी अपील की थी लेकिन अदालत ने उसे ख़ारिज कर दिया.

यह मामला 20 साल पुराना है.

अगस्त 1990 में 14 वर्षीय टेनिस खिलाड़ी रुचिका गिरहोत्रा के साथ छेड़छाड़ का मामला प्रकाश में आया था. उस समय एसपीएस राठौर हरियाणा पुलिस में महानिरीक्षक थे और साथ ही पंचकुला में हरियाणा लॉन टेनिस एसोसिएशन के अध्यक्ष भी थे.

इस घटना के तीन साल बाद अगस्त, 1993 में रुचिका ने आत्महत्या कर ली थी.

फ़ैसला

Image caption राठौर की यह मुस्कान उन पर भारी पड़ गई

इस फ़ैसले पर ख़ुशी ज़ाहिर करते हुए रुचिका के पिता सुभाष गिरहोत्रा ने कहा, "आख़िर न्याय मिला."

उल्लेखनीय है कि जब एसपीएस रौठौर को छह महीने की सज़ा सुनाई गई थी तो वे अदालत से मुस्कुराते हुए बाहर निकले थे. जिसकी तस्वीर प्रकाशित होने के बाद लोगों ने नाराज़गी ज़ाहिर की थी.

इसके बाद से देश भर में यह बहस चल पड़ी थी कि एक गंभीर अपराध के लिए बहुत देर से सज़ा मिली वह भी बहुत कम.

फिर राठौर के ख़िलाफ़ दो नए मामले भी दर्ज किए गए थे. इन नए मामलों की जाँच सीबीआई कर रही है और इन मामलों में आरोप पत्र दाखिल किया जाना अभी शेष है.

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