वीज़ा न देने के और मामले सामने आए

  • 27 मई 2010

भारतीय नागरिकों को कनाडा द्वारा वीज़ा न देने के और मामले सामने आए हैं.

पंजाब में पटियाला के एसएसपी आरएस खत्रा ने कहा है कि उन्हें कनाडा ने ये कहकर वीज़ा देने से मना कर दिया है कि ‘वे उस सिस्टम हिस्सा रहे हैं जिसने पंजाब में मानवाधिकारों का हनन किया है.’

आरएस खत्रा ने कहा कि इस फ़ैसले के ख़िलाफ़ उन्होंने अपील की थी पर उसे खारिज कर दिया गया.

वहीं इंटेलीजेंस ब्यूरो के पूर्व अधिकारी एसएस सिद्धू ने एक टीवी चैनल से बातचीत में कहा है कि उन्हें कनाडा का वीज़ा नहीं दिया गया क्योंकि कनाडा के मुताबिक आईबी ‘आतंकवादी’ गतिविधियों में लिप्त है.

वीज़ा मना करने का ये पहला मामला नहीं है. कुछ दिन पहले ही ये मामला सामने आया था कि सीमा सुरक्षा बल के एक पूर्व अधिकारी फ़तेह सिंह पंढेर को कनाडा ने वीज़ा नहीं दिया है.

कारण ये बताया गया था कि बीएसएफ़ कश्मीर में मानवाधिकारों के हनन में शामिल अर्धसैनिक बल है.

विवाद

फ़तेह सिंह ने बीबीसी को बताया था कि कनाडा के उच्चायुक्त ने उन्हें एक पत्र लिखकर कहा है कि बीएसएफ़ एक हिंसक अर्धसैनिक बल है इसलिए उन्हें या उनके परिवार को कनाडा जाने का वीज़ा नहीं मिल सकता.

दो दिन पहले हुई एक पत्रकार वार्ता में विदेश सचिव निरुपमा राव से एक पत्रकार ने ये सवाल पूछा था कनाडा ने पंजाब के दो पुलिस अधिकारियों को ये कहते हुए वीज़ा देने से मना कर दिया है कि वे आंतकवादी गतिविधियों में शामिल है तो भारत की इस पर क्या सोच है.

विदेश सचिव ने कहा था कि जब ये मामला सामने आया था तो विदेश मंत्रालय ने ये मुद्दा कनाडा हाई कमिशन के सामने उठाया था.

उन्होंने कहा कि कनाडा के विदेश मंत्री कह चुके हैं कि भारत के लोकतांत्रिक संस्थानों और प्रक्रियाओं का कनाडा पूरा सम्मान करता है.

निरुपमा राव ने बताया कि भारत इस मामले को गंभीरता से ले रहा है.

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