हू जिंताओ से मिलेंगी प्रतिभा पाटिल

Image caption राष्ट्रपति छह दिन के चीन दौरे पर हैं

चीन की यात्रा पर गईं राष्ट्रपति प्रतिभा देवीसिंह पाटिल गुरुवार को चीन के राष्ट्रपति हू जिंताओ से मुलाक़ात करेंगी.

पिछले एक दशक में भारत के किसी राष्ट्र अध्यक्ष की ये पहली चीन यात्रा है.

राष्ट्रपति प्रतिभा देवीसिंह पाटिल बुधवार को चीन पहुँची थी जहाँ बीजिंग अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे पर चीन के विदेश सह मंत्री और भारतीय राजदूत एस जयशंकर ने उनका स्वागत किया था.

माना जा रहा है कि राष्ट्रपति की छह दिन की यात्रा के दौरान कई समझौतों पर हस्ताक्षर किए जाएँगे.

इस दौरान राजनीतिक मसलों, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और आर्थिक सहयोग बातचीत का मुख्य केंद्र रहने की उम्मीद है.

अहम दौरा

बीजिंग के अलावा राष्ट्रपति केंद्रीय चीन के लोयांग शहर भी जाएँगी जहाँ वे मशहूर व्हाइट हॉर्स बौद्ध मंदिर का उदघाटन करेंगी. वे शंघाई का दौरा भी करेंगी जहाँ वे शंघाई एक्सपो 2010 में भारत और चीन के पविलियन जाएँगी.

राष्ट्रपति की चीन यात्रा से पहले भारतीय विदेश सचिव निरुपमा राव ने दिल्ली में कहा था कि ये यात्रा दर्शाती है कि भारत चीन के साथ सहयोग बढ़ाने को लेकर कटिबद्ध है.

वहीं चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता जियांग यू ने भारतीय राष्ट्रपति की यात्रा का स्वागत करते हुए कहा है दोनों देश इस मौके का उपयोग द्विपक्षीय समझ-बूझ और सहयोग बढ़ाने के लिए करेंगे ताकि भारत-चीन संबंधों को नए स्तर पर ले जाया जा सके.

प्रवक्ता ने कहा, “ये यात्रा ऐसे समय हो रही है जब भारत-चीन संबंध तेज़ी से बढ़ रहे हैं- जैसा कि दोनों देशों के प्रतिनिधियों की एक दूसरे के देशों में लगातार हो रहे दौरों से पता चलता है. इससे राजनीतिक भरोसा और क्षेत्रीय-अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर सहयोग बढ़ा है.”

राष्ट्रपति के साथ फ़ूड प्रोसेसिंग राज्य मंत्री सुबोध कांत सहाय, तीन सांसद और एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल भी गया है.

आख़िरी बार वर्ष 2000 में तत्कालीन राष्ट्रपति केआर नारायणन ने चीन का दौरा किया था.

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