14 साल की उम्र में आईआईटी

सहल कौशिक
Image caption सिर्फ 14 साल की उम्र में आई आई टी परीक्षा में सफल

चौदह साल की उम्र में बच्चे अक्सर ये नहीं जानते कि उन्हे ज़िंदगी में आगे क्या करना है,पर दिल्ली के सहल कौशिक को इस उम्र मे न सिर्फ पता है कि उन्हें ज़िंदगी में आगे क्या करना है बल्कि उहोंने इस ओर अपने कदम भी बढ़ा दिए है.

सहल कौशिक ने 12वीं कक्षा के बाद देश की सबसे मुश्किल प्रतियोगिताओं में से एक माने जाने वाली आईआईटी परीक्षा में 33वां स्थान हासिल किया है और दिल्ली क्षेत्र में वे पहले स्थान पर रहे है. चौदह साल की उम्र में वे देश के सबसे छोटे आईआईटीयन बन गए हैं.

सहल एशियन ओलंपियाड में भी भारत की नुमाइंदगी कर चुके है. इससे पहले सहल कौशिक को कम उम्र की वजह से 10वीं की परीक्षा देने के लिए भी दिल्ली उच्च न्यायालय से विशेष अनुमति लेनी पड़ी थी.

सहल के पिता तारकेश्वर कौशिक भारतीय सेना में कर्नल है और सहल की माँ रुचि कौशिक डॉक्टर हैं. सहल ने अपनी पूरी पढ़ाई स्कूल मे नहीं बल्कि घर में की. सहल की माँ रुचि कौशिक ने अपना डॉक्टरी का पेशा छोड़ कर सहल को घर पर ही आई आई टी की तैयारी करवाई.

सहल की माँ रुचि कौशिक से हमने पूछा कि उन्होने सहल के स्कूल में क्या नहीं पढाया, तो रुचि कौशिक कहती है. "सहल बचपन से ही काफी तेज़ था. हमने सोचा कि चलो घर पर पढ़ा कर देखते है, क्योकि अगर वो स्कूल जाएगा तो वो उसे वही पढ़ाएँगे जो वो पहले से ही जानता है."

सहल बचपन से ही प्रतिभा के धनी है. जब वे सिर्फ छह साल के थे तभी से सहल उपन्यास पढ़ने लगे थे.

सहल को पढ़ने के अलावा गाने सुनना और उपन्यास पढ़ना पसंद है.

सहल से जब हमने पूछा कि आईआईटी परीक्षा मे सफलता के लिए वो क्या गुर देंगे. सहल कहते है "अपने कॉन्सेप्ट पर पकड़ रखें. पिछले साल के पेपर की मदद से अभ्यास करें और पाठयक्रम की किताबे जरुर पढ़ें."

सहल अपनी सफलता का श्रेय अपनी माँ और नारायना ऐकेडमी मे फिजिक्स के अध्यापक उदय प्रताप सिंह को देते है.

लेकिन भविष्य में क्या करना चाहतें है इस मामले में भी सहल की सोच ज़रा अलग है. उन्होंने आईआईटी में 33वां स्थान हासिल किया है लेकिन वे दिल से इंजिनियरिगं के बजाए फिजिक्स मे बीएससी करना चाहते है ताकि एस्ट्रो- फिजिक्स में अनुसंधान कर सकें.

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