मुंबई के स्टेशन का आँखों देखा हाल

  • 28 मई 2010
लोग अपने परिजनों का हाल जानने के लिए बेचैन हैं
Image caption लोग अपने परिजनों का हाल जानने के लिए बेचैन हैं

मुंबई के कुर्ला स्टेशन से थोड़ी ही दूर स्थित लोकमान्य तिलक टर्मिनस पर लोगों का ताँता लगा हुआ है. हैरान परेशान लोग ज्ञानेश्वरी एक्सप्रेस से यात्रा कर रहे अपने परिवार, रिश्तेदारों की खोज-ख़बर लेने की भरसक कोशिश कर रहे हैं.

वहीं एक दफ़्तर के बाहर रखी मेज़ के पीछे चार-पाँच रेल अधिकारी बैठे हैं.

उनके हाथ में ढेर सारे कागज़ हैं. जैसे-जैसे उन्हें घटना में घायल या हताहत हुए लोगों के बारे में जानकारी मिलती है, वो वहाँ मौजूद लोगों और पत्रकारों को बताते हैं. उनके सामने दो टेलीफ़ोन रखे हैं जो थोड़ी-थोड़ी देर में बज उठते हैं.

लोगों की सुविधा के लिए दफ़्तर के बाहर घायल लोगों की एक सूची चिपका दी गई है. साथ ही स्टेशन के साउंड सिस्टम पर बार-बार घोषणा की जा रही है कि लोग मदद के लिए क्या करें.

यहाँ मौजूद लोगों में मोहम्मद सैफ़ुल ग़ाज़ी भी थे. उनके बड़े भाई वायद अपने दो बच्चों, 10 वर्षीय मीना और आठ वर्षीय हबीबुल के साथ इसी गाड़ी में यात्रा कर रहे थे.

इस घटना में वायद घायल हो गए थे और वो लगातार सैफ़ुल के साथ संपर्क में थे. लेकिन चिंता की बात ये कि मीना और हबीबुल के बारे में कुछ भी पता नहीं लग पा रहा था. अपने बड़े भाई की सलामती की ख़बर पाकर सैफ़ुल बेहद खुश थे, और उन्हें उम्मीद थी कि दोनो बच्चे भी सही सलामत होंगे.

सैफ़ुल पत्रकारों को अपनी व्यथा सुना ही रहे थे कि उनका वायद से दोबारा संपर्क स्थापित हुआ. वायद ने उन्हें रोते हुए बताया कि मीना और हबीबुल की मौत हो चुकी है और उनकी लाश मिली है.

ये सुनते ही सैफ़ुल रो पड़े. साथ के कुछ लोगों ने उन्हें संभालने की कोशिश की और उन्हें किनारे ले गए.

दुख भरा माहौल

आज सुबह जब सैफ़ुल सुबह सोकर उठे थे तो अपने भाई को टीवी पर देखकर वो चौंक पड़े थे. सैफ़ुल ने कहा, "मेरे बड़े भाई टीवी के सामने इतना तड़प रहे थे कि हम उन्हें देखकर विश्वास नहीं कर पाए. उन्हें देखकर मेरी भाभी बेहोश हो गईं. हमने हेल्पलाइन नंबरों को फ़ोन लगाया लेकिन या हमें दूसरे नंबरों पर फ़ोन करने को कहा गया".

Image caption घायलों की सूची काफ़ी लंबी है

कई लोगों ने हमें बताया कि हेल्पलाइन नंबरों से उन्हें कोई खास मदद नहीं मिल रही है.

अधिकारियों का कहना था कि सैफ़ुल जैसे लोग जो घटनास्थल तक जाना चाहते हैं उन्हें वो पक्का टिकट दे रहे हैं.

हरिलाल गुप्ता को भी अपनी बहन और भतीजे का इंतज़ार था. हरिलाल के भाई के लड़के की शादी 31 मई को तय हुई थी और दोनो इसी शादी का हिस्सा बनने मुंबई आ रहे थे.

वो कहते हैं, "मेरी बहन प्रेमा से मेरी आखिरी बात कल रात हुई थी लेकिन उसके बाद उनसे मेरा संपर्क नहीं स्थापित हो पा रहा है. प्रेमा ने मुझसे कुर्ला स्टेशन पहुँचने को कहा था".

हरिलाल को सुबह टीवी से पता चला कि गाड़ी दुर्घटनाग्रस्त हो गई है. वो सुबह आठ बजे से यहाँ के चक्कर मार रहे हैं लेकिन उन्हें कोई जानकारी नहीं मिल पाई है.

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