डिब्बे पटरी से उतरे, 100 से अधिक मारे गए

  • 28 मई 2010

पश्चिम बंगाल के मिदनापुर इलाक़े में फ़िशप्लेट उखाड़े जाने की एक घटना के बाद ट्रेन के कुछ डिब्बे पटरी से उतर गए. इस घटना में मृतकों की संख्या सौ से अधिक हो गई है जबकि 149 लोग घायल हुए हैं. कुछ की स्थिति गंभीर है.

अधिकारियों का कहना है कि पहले तो यात्री ट्रेन पटरी से उतरी और उसके कुछ डिब्बे पलट गए लेकिन बाद में दूसरी पटरी पर गुज़र रही मालगाड़ी ने पलटे हुए डिब्बों को ठोकर मार दी जिससे घटना की गंभीरता बढ़ गई.

राहतकर्मियों ने घटनास्थल से 78 शव निकाल लिए हैं लेकिन 30 शव अब भी रेलगाड़ी में फँसे हुए हैं.

पश्चिम बंगाल के पुलिस महानिदेशक भूपेंद्र सिंह ने इसे माओवादियों की कार्रवाई बताया है.

ज्ञानेश्वरी एक्सप्रेस में सवार यात्रियों की सूची देखने के लिए क्लिक करें

उनका कहना था, "यह काम माओवादियों ने किया है. और हमे यहाँ दो पोस्टर मिले है जिनमे पीसीपीए ने इस हमले की जिम्मेदारी ली है. हम समझते है कि पीसीपीए और माओवादी एक ही है. इसके अलावा जो भी हमारे पास खबरें आ रही है, उससे पता चल रहा है कि यह काम माओवादियों ने किया है".

लेकिन माओवादियों के एक प्रवक्ता ने इस घटना से संबंधित होने का साफ़ खंडन किया है.

चौदह यात्री डिब्बे चपेट में आए

पुलिस महानिदेशक भूपेंद्र सिंह ने कहा, "रेल ड्राइवर का कहना है कि जब गाडी 11 नंबर और 13 नंबर खंबे के बीच से गुज़र रही थी तो उस वक़्त उसे धमाके की आवाज़ सुनाई दी थी. इसके बाद कंपन हुआ और गाड़ी पटरी से उतर गई. एक मिनट बाद ही दूसरी दिशा से आ रही मालगाडी पटरी से उतरी रेलगाड़ी से टकरा गई".

रेलवे पुलिस के अधिकारी दिलीप मित्रा ने बताया कि आधी रात के थोड़ी ही देर बाद यात्रियों को मुंबई से कोलकाता ले जा रही ज्ञानेश्वरी एक्सप्रेस के कुछ डिब्बे पश्चिम मिदनापुर ज़िले के सरडीहा स्टेशन के क़रीब पटरी से उतर गए और दूसरी ओर से आ रही मालगाड़ी ने उन्हें टक्कर मार दी.

दिलीप मित्रा का कहना है कि कई यात्री अब भी टूटी हुई बोगियों में फंसे हैं और मरने वालों की संख्या बढ़ सकती है.

तोड़फोड़ की कार्रवाई है: चिदंबरम

यह क्षेत्र माओवादियों का गढ़ माना जाता है. उन्होंने 28 मई से दो जून तक चलने वाले सप्ताह को काला सप्ताह के रूप में मनाने का आह्वान किया था.

रेलवे के प्रवक्ता सौमित्र मजूमदार ने बीबीसी को बताया, "तेरह डिब्बे पटरी से उतर कर दूसरी ओर की पटरी पर गिर गए और उधर से आने वाली मालगाड़ी से उनकी ज़बरदस्त टक्कर हो गई. कई डिब्बे तो पूरी तरह चकनाचूर हो गए हैं".

सुपर डीलेक्स एकस्प्रेस माने जाने वाली इस गाड़ी के इन 13 डिब्बों में 10 स्लीपर और एक अनारक्षित डिब्बा शामिल थे.

'राज्य सरकार की ज़िम्मेदारी'

रेलमंत्री ममता बनर्जी वायुसेना के हेलीकॉप्टर से घटनास्थल पहुँचीं और और उन्होंने माओवादियों की धमकी के बावजूद पर्याप्त सुरक्षा मुहैया न कराने के लिए पश्चिम बंगाल सरकार को दोषी ठहराया.

हालाँकि पश्चिम बंगाल के पुलिस प्रमुख भूपेंद्र सिंह ने कहा कि मिदनापुर ज़िले में पूरी सुरक्षा व्यवस्था की गई थी.

रेलमंत्री ने मृतकों के परिवारों को पाँच लाख और घायलों को एक-एक लाख रुपये के मुआवज़े का भी ऐलान किया.

स्थानीय पत्रकार नरेश जाना ने बताया, "मैं कम से कम चार डिब्बों को पूरी तरह क्षतिग्रस्त देख पा रहा हूँ. मुझे मालगाड़ी के नीचे दबे अनेक शव भी नज़र आ रहे हैं. लोग रो रहे हैं. राहतकर्मी शवों को बाहर निकालने का प्रयास कर रहे हैं".

हाल के महीनों में माओवादी विद्रोहियों ने सरकार के उन्हें उनके जंगलों में स्थित ठिकानों से बाहर निकालने के अभियान के जवाब में हमले तेज़ कर दिए हैं.

उन्होंने पुलिस, सरकारी इमारतों और रेलवे स्टेशनों जैसे मूल ढाँचों पर कई बार हमले किए हैं. इस महीने के शुरू में उन्होंने छत्तीसगढ़ में एक बस को उड़ा दिया था जिसमें 35 लोगों की जानें गई थीं.

प्रधानमंत्री डॉक्टर मनमोहन सिंह ने माओवादियों की कार्रवाइयों को देश की आंतरिक सुरक्षा को सबसे बड़ी चुनौती बताया है.

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