लगा ट्रेन पलट गई है

रेल दुर्घटना
Image caption राहत का कार्य जारी है और अब भी सभी शवों को नहीं निकाला जा सका है

पश्चिम बंगाल के मिदनापुर ज़िले में हुई रेल दुर्घटना में कम से कम 65 यात्री काल के गाल में समा गए, अन्य 150 से अधिक यात्री घायल हैं.

हादसे की जगह अब भी स्थिति मातम जैसी है और वहां कोहराम मचा हुआ है. हादसे की जगह और दूसरे स्थानों पर लोगों ने अपनी बेबसी बयान किया.

'भयानक दुर्घटना'

"हमें लगा कि रेल पलटी खा गई है. इसके बाद हम सीधे खड़े हुए. 10-15 सेकंड बाद ही दूसरी ट्रेन आई और उसने टक्कर मारी, तब यह दुर्घटना भयानक हो गई."

'अंधेरा ही अंधेरा'

"अचानक रात को ट्रेन पलट गई. हम सब एक ओर हो गए, एक दूसरे पर गिर गए. उसके बाद मुझे मालूम नहीं. बाहर आकर देखा कि अंधेरा ही अंधेरा था. कोई आसपास नहीं था. तीन-चार बजे तक कोई नहीं आया, उस समय अगर लोग बाहर निकल पाते तो कई जानें और बचाई जा सकती थीं."

'धमाका नहीं हुआ'

"हम लोग एस-7 की सीट नंबर 30 पर बैठे थे, लगभग एक बजकर 10 मिनट के आसपास हम खाना खाने बैठे थे, अचानक एक आवाज़ आई और लगा कि गाड़ी पटरी से उतर गई है. गाड़ी बहुत हिल रही थी. लेकिन जैसा कि कई लोग कह रहे हैं हमने कोई धमाके की आवाज़ नहीं सुनी."

मुंबई से बीबीसी संवाददाता विनीत खरे का कहना है कि मिदनापुर ज़िले में पेश आए रेल हादसे की वजह से यहां के लोकमान्य तिलक रेलवे स्टेशन पर मामत का माहौल है और कई लोग अपने प्रिये का हाल जानने के लिए स्टेशन पर बनाए गए विशेष सहायता केंद्र से जानकारी ले रहे हैं.

अपनी बहन और भांजे का इंतज़ार कर रहे हरि लाल गुप्ता का कहना है, “मेरी बहन प्रभा देवी और 23 वर्षीय भांजा हरिकेश हादसे की शिकार हुई ट्रेन पर सवार थे और अब तक हमें उनके बारे में कोई जानकारी नहीं मिली है.”

अनेक परिजनों ने आरोप लगाया कि विशेष सहायता केंद्र से सही जानकारी नहीं मिल रहीं हैं.

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