मुठभेड़ मामले में दोषियों को बख़्शेंगे नहीं: एंटनी

  • 30 मई 2010
प्रदर्शन

भारत प्रशासित जम्मू-कश्मीर में तीन युवकों की एक कथित फ़र्ज़ी मुठभेड़ में हत्या के मुद्दे पर कश्मीर घाटी में हज़ारों लोगों ने प्रदर्शन किया है.

कुछ सैन्यकर्मियों के इस घटना से संबंधित होने की ख़बरें आने के बाद रक्षा मंत्री एके एंटनी ने कहा कि मामले को रफ़ा-दफ़ा करने का सवाल ही नहीं उठता और यदि किसी को दोषी पाया गया तो उसे बख़्शा नहीं जाएगा.

ग़ौरतलब है कि हाल ही में सेना ने भारत-पाक नियंत्रण रेखा के पास स्थित मछील सैक्टर में तीन चरमपंथियों के एक मुठभेड़ में मारे जाने की ख़बर दी थी.

बीबीसी संवाददाता अल्ताफ़ हुसैन के अनुसार बांदीपोरा ज़िले के नादिहाल के निवासियों को शक़ था कि मारे गए युवक 27 अप्रैल को उनके गाँव से लापता हुए युवक हो सकते हैं.

इस मामले की पुलिस ने जब जाँच की तो दो स्पेशल पुलिस अफ़सरों को गिरफ़्तार किया गया और पुलिस के अनुसार उन्होंने बताया कि उन्होंने इन तीन युवकों का अपहरण किया था और फिर उन्हें सेना के हवाले कर दिया था.

शुक्रवार को उत्तरी कश्मीर रेंज के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी अब्दुल क़यूम मिनहास ने बीबीसी को बताया कि पुलिसकर्मियों का एक दल तीनों युवकों के शवों को उस जगह से निकालने के लिए गया है जहाँ उन्हें दफ़न किया गया था.

शुरुआती जाँच में मेजर का नाम

बीबीसी संवाददाता अल्ताफ़ हुसैन के अनुसार पुलिस की जाँच से पता चला है कि तीनों युवकों को सेना का एक जवान बहका कर ले गया था और अप्रैल 30 को इनकी हत्या कर दी गई.

शुरुआती जाँच में पुलिस को संकेत मिले हैं कि भारतीय सेना के एक मेजर का इस मामले से संबंध हो सकता है. सोपोर ज़िले के पुलिस प्रमुख ने बीबीसी को बताया कि अपहरण और हत्या का मामला दर्ज किया गया है.

उन्होंने ये भी बताया कि एक जवान जिसपर इन युवकों को बहका कर ले जाने का आरोप था, उसे गिरफ़्तार कर लिया गया है लेकिन मेजर के ख़िलाफ़ अभी कोई कार्रवाई नहीं हुई है.

'दोषियों को बख़्शेंगे नहीं'

इस बारे में सेना ने मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला को सहयोग का आश्वासन दिया है. सेना ने अपनी ओर से एक विभागीय जाँच भी शुरु कर दी है.

समाचार एजेंसियों के अनुसार मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने पूरे मामले की मैजिस्ट्रेट के जाँच कराए जाने के आदेश दे दिए हैं.

उधर भारत के रक्षा मंत्री एके एंटनी ने पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा, "जम्मू-कश्मीर की सरकार ने पहले ही इस मामले की जाँच के आदेश दे दिए हैं. हम उनसे पूरी तरह सहयोग करेंगे. मामले के रफ़ा-दफ़ा करने का सवाल ही नहीं उठता. जो भी दोषी होगा, उसे सज़ा दी जाएगी...किसी को बख़्शा नहीं जाएगा."

जम्मू-कश्मीर की पुलिस ने टेरिटोरियल आर्मी के एक जवान समेत तीन लोगों को गिरफ़्तार कर लिया है. इनके ख़िलाफ़ पहले ही हत्या का मुकदमा दर्ज है.

शनिवार को कश्मीर घाटी में हज़ारों लोगों ने कथित फ़र्ज़ी मुठभेड़ मामले पर विरोध जताते हुए प्रदर्शन किया. कुछ जगहों पर पुलिस से झड़प भी हुई और प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए पुलिस को आसूँ गैस छोड़नी पड़ी और हवा में फ़ायरिंग भी की गई.

बारामुला में तीनों युवकों के शवों को दफ़ना दिया गया है.

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