ट्रेन दुर्घटना: मृतकों की संख्या 137 हुई

  • 29 मई 2010
मिदनापुर रेल हादसा
Image caption दुर्घटनाग्रस्त डिब्बों से यात्रियों को निकालने में काफ़ी परेशानी हुई

पश्चिम बंगाल में पटरी में हुई तोड़फोड़ के बाद ज्ञानेश्वरी एक्सप्रेस के 13 डिब्बों के पटरी से उतर जाने की घटना में मारे गए लोगों की संख्या 137 हो गई है. लगभग 250 लोग घायल हैं.

अधिकारियों का कहना है कि अभी भी मलबे में फँसे हुए लोगों को निकालने का काम जारी है और आशंका है कि कुछ लोग मालगाड़ी के इंजन के नीचे फँसे हुए हो सकते हैं.

राज्य के मिदनापुर इलाक़े में गुरुवार को देर रात हावड़ा से मुंबई जा रही ट्रेन पटरी से उतर गई थी और दूसरी रेल लाइन पर आ रही एक मालगाड़ी उतरे हुए डिब्बों से जा टकराई थी.

अभी भी हादसे के कारणों को लेकर अलग-अलग बयान आ रहे हैं. लेकिन केंद्रीय गृहमंत्री और रेलवे मंत्री दोनों ने कहा है कि इस दुर्घटना के पीछे तोड़फोड़ है.

पश्चिम बंगाल के रेलवे के अतिरिक्त महानिदेशक दिलिप मित्रा ने बताया कि ज्ञानेश्वरी एक्सप्रेस के ड्राइवर ने झारग्रम रेलवे थाने में एफ़आईआर दर्ज कराया है. मित्रा ने कहा कि एफ़ आई आर में किसी को नामज़द नहीं किया गया है.

रेलवे ने एहतियात के तौर पर बंगाल और उड़ीसा के माओवाद प्रभावी इलाक़ें से रात के समय रेल सेवा बंद करने का फ़ैसला किया है.

डीएनए टेस्ट होगा

पश्चिमी मिदनापुर के एसपी मनोज कुमार वर्मा ने बताया कि 96 शवों को मिदनापुर अस्पताल में रखा गया है जबकि दो शव को खड़गपुर रेलवे अस्पताल में रखा गया है.

श्री वर्मा ने बताया कि शवों को इस तरह से रखा जा रहा है कि ज़रूरत पड़ने पर उन शवों का डीएनए किया जा सके. सरकार ने मरने वालों के डीएनए जांच के आदेश दे दिए है.

मृतकों और घायलों के परिजनों को सूचना देने के लिए अस्पताल में दो कैम्प भी बनाए गए हैं और सरकारी वेबसाईट पर भी सारी सूचनाऐ दी जा रही हैं. लेकिन अस्पताल में लोगों और कर्मचारियों को कई दिक़्कतों का सामना करना पड़ रहा है.

अस्पताल के शव गृह में जगह की बहुत कमी है.

अस्पताल के एक गैरेज को अस्थाई शव गृह बनाया गया है और शवों को बर्फ़ की सिल्ली पर रखा गया है. लेकिन इतनी भीषण गर्मी के कारण अधिकारियों को काम करने में काफ़ी परेशानी हो रही है.

अस्पताल ने एक बड़ा से एलसीडी स्क्रीन भी लगा दिया है जिस पर शवों को दिखाया जा रहा है ताकि उनके रिशतेदार शवों को पहचान सकें.

राजनीतिक बयानबाज़ी

रेल मंत्री ममता बैनर्जी ने शनिवार को पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि ये घटना उनके राजनीतिक विरोधियों की एक साज़िश है. ममता बनर्जी ने पूरे घटना की सीबीआई से जांच की मांग की है.

शनिवार को हादसे के बाद रेल मंत्री ममता बनर्जी ने कहा था कि एक धमाका भी हुआ था लेकिन राज्य सरकार और केंद्रीय गृह मंत्रालय ने इसकी पुष्टि नहीं की थी.

केंद्रीय गृहमंत्री पी चिदंबरम ने कहा था कि ये तोड़फोड़ की कारर्वाई है लेकिन किसी विस्फोटक का इस्तेमाल किया गया या नहीं ये अभी नहीं कहा जा सकता.

हादसे के फ़ौरन बाद पश्चिम बंगाल के पुलिस महानिदेशक भूपेंद्र सिंह ने इसे माओवादियों की कार्रवाई बताया था.

भूपेंद्र सिंह के अनुसार, "यह काम माओवादियों ने किया है. और हमे यहाँ दो पोस्टर मिले है जिनमे पीसीपीए ने इस हमले की जिम्मेदारी ली है. हम समझते है कि पीसीपीए और माओवादी एक ही है. इसके अलावा जो भी हमारे पास खबरें आ रही है, उससे पता चल रहा है कि यह काम माओवादियों ने किया है".

लेकिन माओवादियों और पीपुल्स कमेटी अगेंस्ट पुलिस एट्रोसीटीज़ (पीसीएपीए) ने शनिवार को एक बयान जारी कर कहा है कि इस घटना में उनका हाथ नहीं है.

दोनों संगठनों ने इसके लिए सीधे तौर पर मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी को ज़िम्मेदार ठहराया है.

पश्चिम बंगाल में सत्ताधारी मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी ने विपक्षी दल त्रिणमूल कांग्रेस की नेता और रेल मंत्री ममता बनर्जी को निशाना बनाया है.

वरिष्ठ नेता सीताराम येचुरी ने कहा है कि ममता बनर्जी तो ये कहती आई हैं कि राज्य में माओवादी हैं ही नहीं. सीपीएम के राज्य सचिव बिमान बोस ने कहा कि रेल मंत्री को ज़िम्मेदारी स्वीकार करनी चाहिए.

उनका कहना था कि माओवादियों ने उस इलाक़े में रेलवे लाइन को पहले भी निशाना बनाया है इसलिए रेलवे की सुरक्षा व्यवस्था और सतर्कता अधिक होनी चाहिए थी.

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