पश्चिम बंगाल: स्थानीय निकायों के चुनाव में हिंसा

पश्चिम बंगाल

पश्चिम बंगाल के स्थानीय निकायों के लिए रविवार को हुए मतदान के दौरान कई स्थानों पर हिंसा हुई.

कोलकाता के पातुली इलाक़े में पुलिस ने मार्क्सवादी और तृणमूल समर्थकों के बीच झड़प रोकने के लिए गोली चलाई है, जिसमें एक सीपीएम समर्थक को गोली लगी है.

उधर हालीशहर में हुई हिंसा में चार लोग घायल हुए हैं.

बर्धवान ज़िले के जमुरिया में भी वामपंथी और तृणमूल कांग्रेस के समर्थकों में झड़प हुई. इसमें पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा. इस दौरान देसी बमों और तलवारों का इस्तेमाल हुआ.

इस हिंसा में एक पुलिसकर्मी घायल हो गया और पुलिस का एक वाहन क्षतिग्रस्त हो गया.

इसके अलावा कोलकाता के पार्क सर्कस और बेलाघाट और बरकपुर में भी हिंसा हुई है. इन इलाक़ों से पुलिस ने 13 लोगों को हिरासत में लिया है.

हिंसा के बावजूद लोगों की लंबी कतारें लगीं हुईं हैं, खासकर महिलाएँ बड़ी संख्या में मतदान के लिए आगे आईं हैं.

अधिकतर स्थानों पर दोपहर तक लगभग 40 फ़ीसदी मतदान हो गया था.

उल्लेखनीय है कि पश्चिम बंगाल में रविवार को 81 स्थानीय निकायों के लिए मतदान चल रहा है. इनमें प्रतिष्ठित कोलकाता नगरपालिका का चुनाव भी शामिल हैं.

मतदान के दौरान 17 स्थानों पर ईवीएम ख़राब निकलीं जिसके कारण चुनाव अधिकारियों को मतदाताओं के रोष का सामना करना पड़ा.

उल्लेखनीय है कि इन चुनावों में कांग्रेस, वामपंथी और तृणमूल कांग्रेस अलग अलग मैदान में हैं.

इन चुनावों पर सभी की निगाहें हैं क्योंकि ये अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों का रिहर्सल माना जा रहा है.

दिलचस्प तथ्य ये है इन चुनावों में कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस का ‘महाजोट’ टूट गया है.

माना जा रहा है कि ममता बनर्जी अकेले चुनाव लड़के अपनी ताक़त दिखाना चाहती हैं.

कड़ा मुक़ाबला

वर्ष 2008 में ग्राम पंचायतों के चुनावों के बाद से ही वामपंथी दलों को एक के बाद एक झटके लगे हैं.

लोक सभा चुनावों में वामपंथियों को भारी धक्का लगा था, इन चुनावों में 42 में से 25 सीटें कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस गठबंधन ने झटक लीं थीं.

चुनावों में तृणमूल कांग्रेस मज़बूत मानी जा रही है, हालांकि वामपंथी और कांग्रेस के अपने गढ़ों में स्थिति काफ़ी अच्छी है.

पिछले चुनावों में 81 में से 54 स्थानीय निकायों पर वामपंथी दलों का कब्ज़ा था.

तृणमूल कांग्रेस प्रमुख और केंद्रीय रेल मंत्री ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि सीटों के बंटवारे पर हुई बातचीत में बंगाल कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने उनकी पार्टी का अपमान किया है.

ममता बनर्जी का कहना था कि सत्ताधारी मार्क्सवादियों के साथ ख़ुफ़िया तौर पर राजनीतिक संबंध रखने वाले बंगाल कांग्रेस के कई बड़े नेताओं ने इस गठबंधन को नुक़सान पहुंचाया है.

दूसरी ओर कांग्रेस ने ममता बनर्जी को ‘ज़िद्दी’ और ‘कठोर’ बताते हुए आरोप लगाया कि वो कोई समझौता करना ही नहीं चाहती थीं.

वर्ष 1997 में राज्य के नेताओं के साथ उभरे गंभीर मतभेदों के बाद ममता बनर्जी ने तृणमूल कांग्रेस का गठन किया था और एक दशक के भीतर ही तृणमूल कांग्रेस ने एक मज़बूत विपक्ष की भूमिका संभाल ली है.

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