सोरेन ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफ़ा दिया

  • 30 मई 2010
Image caption शिबू सोरेन ने कांग्रेस के पक्ष में वोट डालने के बाद कहा था कि उनसे गलती हो गई.

लगभग एक महीने की जोड़तोड़ के बाद आख़िरकार झारखंड के मुख्यमंत्री शिबू सोरेन ने अपने पद से इस्तीफ़ा दे दिया.

सोरेन को 31 मई को विधानसभा में बहुमत साबित करना था लेकिन जब ये स्पष्ठ हो गया कि वो ऐसा नहीं कर पाएंगे तो रविवार देर शाम उन्होंने राज्यपाल को अपना इस्तीफ़ा सौंप दिया.

सोरेन की झारखंड मुक्ति मोर्चा पार्टी ने शनिवार को सभी पार्टियों से अपील की थी कि जो भी पार्टी जेएमएम का साथ देती है उसे वो सरकार बनाने में मदद करेगी.

लेकिन रविवार को स्थिति स्पष्ट हो चुकी थी.

पार्टी के वरिष्ठ सदस्य हेमलाल मुरमु ने पत्रकारों को बताया कि किसी पार्टी ने अपील पर ध्यान नहीं दिया और ऐसे में सोमवार को बहुमत साबित करना संभव नहीं था.

राज्यपाल ने शिबू सोरेन का इस्तीफ़ा स्वीकार कर लिया है लेकिन उनसे तबतक कार्यवाहक मुख्यमंत्री बने रहने को कहा है जबतक नई सरकार नहीं बन जाती.

आगे क्या?

संभावना है कि राज्यपाल अब विपक्षी दलों को सरकार बनाने का और बहुमत साबित करने का न्यौता देंगे.

लेकिन ये भी स्पष्ट है कि कांग्रेस हो या भाजपा, बिना जेएमएम की मदद के वो सरकार नहीं बना सकते.

विधानसभा में जेएमएम के पास 18 सीटें हैं, भाजपा के पास 18, कांग्रेस के पास 14, झारखंड विकास मंच के पास 11, राष्ट्रीय जनता दल के पास पांच और ऑल झारखंड स्टूडेंट्स यूनियन के पास पांच.

झारखंड मुक्ति मोर्चा ये कह चुकी है कि वो अभी चुनाव नहीं चाहती और कोई दूसरी पार्टी यदि सरकार बनाने के लिए आगे आती है तो वो उसका समर्थन करेगी.

झारखंड में ये राजनीतिक समस्या तब पैदा हुई जब शिबू सोरेन ने पिछले महीने संसद में विपक्ष की तरफ़ से लाए गए कटौती प्रस्ताव में कांग्रेस का साथ दिया.

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