बिहार कांग्रेस : शर्मा,टाइटलर दोनों हटे

जगदीश टाइटलर
Image caption अनिल शर्मा से खींचतान दोनों के हटने का कारण बना

कांग्रेस की बिहार इकाई में दो ख़ेमों के बीच लगभग तीन महीने से जारी कलह या टकराव का नतीजा सामने आ गया है.

पार्टी के राष्ट्रीय नेतृत्व ने अनिल शर्मा को प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष पद से और जगदीश टाइटलर को पार्टी के बिहार प्रभारी पद से हटा दिया है.

इन दोनों और इनके समर्थक गुटों में तकरार की वजह से राज्य कांग्रेस की भारी फजीहत हो रही थी.

अब यहाँ चौधरी महबूब अली क़ैसर को प्रदेश अध्यक्ष और मुकुल वासनिक को बिहार में पार्टी मामले का प्रभारी मनोनीत किया गया है.

ज़मींदार परिवार और कांग्रेसी विरासत वाले क़ैसर सिमरी बख्तियारपुर विधानसभा क्षेत्र से विधायक हैं और राज्य के मंत्री भी रह चुके हैं.

दलित समुदाय से जुड़े मुकुल वासनिक को बिहार में पार्टी का प्रभारी बनाना और महबूब अली क़ैसर को राज्य में दलीय नेतृत्व सौपना, यहाँ कांग्रेस की चुनावी राजनीति का हिस्सा माना जा रहा है.

दलित-मुस्लिम समीकरण

इसी वर्ष अक्टूबर-नवम्बर में होने वाले बिहार विधानसभा चुनाव को ध्यान में रख कर संभवतः 'दलित-मुस्लिम' समीकरण बिठाने की कोशिश की गई है.

अनिल शर्मा चूँकि भूमिहार समाज के हैं इसलिए जब भारतीय जनता पार्टी और जनता दल (यू) ने इसी समाज के व्यक्ति को अपने-अपने दल का प्रदेश अध्यक्ष बना दिया, तब कांग्रेस ने इस फेरबदल की रणनीति अपनाई.

जगदीश टाइटलर को भी इसलिए हटाना पड़ा क्योंकि ऐसा नहीं करने से अनिल शर्मा समर्थकों की नाराज़गी बहुत बढ़ जाती.

फिर भी, दोनों ख़ेमों में खटास इतनी ज़्यादा है कि उन्हें मिटाना बहुत आसान नहीं दिखता. ख़ासकर सदानंद सिंह,रामजतन सिन्हा और अशोक कुमार जैसे यहाँ के पुराने कांग्रेसियों के प्रति अनिल शर्मा गुट की कड़वाहट कम होना मुश्किल है.

दल बदल कर कांग्रेस में आये पप्पू यादव और साधु यादव को बहुत-से कांग्रेसी उनकी विवादास्पद छवि के कारण पसंद नहीं करते हैं.

इसी मुद्दे पर अनिल शर्मा और जगदीश टाइटलर के बीच विवाद शुरू हुआ था.

अब शर्मा के हटाये जाने से टाइटलर समर्थक पप्पू यादव और साधु यादव प्रसन्न हैं.लेकिन लगता नहीं है कि ये विवाद अभी शांत होगा.

अगले कुछ ही महीनों में चुनावी टिकट बांटते समय यह फिर उभर सकता है.

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