कोलकाता नगर निगम में तृणमूल की जीत

तृणमूल के समर्थक (रॉयटर्स/ पार्थ सान्याल)

तृणमूल कांग्रेस ने प्रतिष्ठित कोलकाता नगर निगम चुनाव में जीत हासिल की है.

इसके अलावा पार्टी ने कोलकाता से सटे हुए, सॉल्ट लेक के नाम से जाने जाने वाले क्षेत्र बिधाननगर नगर निगम में भी जीत दर्ज की है.

इसके अलावा पश्चिम बंगाल के 79 नगर निगमों में अभी वोटों की गिनती चल रही है, ताज़ा रुझानों के अनुसार इनमें से अधिकतर में तृणमूल कांग्रेस आगे चल रही है.

प्रतिष्ठित कोलकाता नगर निगम में तृणमूल कांग्रेस ने 141 वार्डों में से 85 पर कब्ज़ा कर लिया है इसलिए उसे कांग्रेस के समर्थन की ज़रूरत नहीं होगी.

इस दौड़ में वाम मोर्चा काफ़ी पीछे छूट गया और वह केवल 46 वार्ड पर ही जीत दर्ज कर पाया.

कांग्रेस के खाते में केवल सात वार्ड ही गए और भाजपा भी एक वार्ड पर जीत दर्ज करने में सफल रही.

बिधाननगर में तृणमूल कांग्रेस ने 18 वार्डों पर जीत हासिल की जबकि वामपंथी केवल सात पर ही जीत हासिल कर सके.

वित्त मंत्री और पश्चिम बंगाल कांग्रेस के प्रमुख प्रणव मुखर्जी ने ममता बनर्जी को बधाई दी है और कहा कि वो लोगों के फ़ैसले को स्वीकार करते हैं.

दिल्ली में पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा,''पहले तो मैं ममता बनर्जी को कोलकाता और अन्य जिलों में अच्छे प्रदर्शन के लिए बधाई देना चाहता हूँ. मैं स्वीकार करता हूँ कि कांग्रेस अपेक्षा के अनुरूप प्रदर्शन नहीं कर पाई. मैं लोगों के फ़ैसले को स्वीकार करता हूँ.''

प्रणव मुखर्जी ने कहा कि ये कहना मुश्किल होगा कि कांग्रेस को कितना नफ़ा नुक़सान हुआ लेकिन पार्टी ने कुछ स्थानों पर अच्छा प्रदर्शन किया है और कुछ पर ख़राब.

उल्लेखनीय है कि पहले कांग्रेस का 14 नगर निगमों पर कब्जा था.

विधानसभा चुनावों का रिहर्सल

उल्लेखनीय है कि पश्चिम बंगाल में रविवार को 81 स्थानीय निकायों के लिए मतदान हुआ था जिसमें से कई स्थानों पर हिंसा हुई थी.

इन चुनावों में कांग्रेस, वामपंथी और तृणमूल कांग्रेस अलग अलग मैदान में हैं.

इन चुनावों पर सभी की निगाहें हैं क्योंकि ये अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों का रिहर्सल माना जा रहा है.

दिलचस्प तथ्य ये है इन चुनावों में कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस का ‘महाजोट’ टूट गया था.

माना जा रहा है कि ममता बनर्जी अकेले चुनाव लड़के अपनी ताक़त दिखाना चाहती हैं.

पिछले चुनावों में 81 में से 54 स्थानीय निकायों पर वामपंथी दलों का कब्ज़ा था.

ग़ौरतलब है कि 1997 में राज्य के नेताओं के साथ उभरे गंभीर मतभेदों के बाद ममता बनर्जी ने तृणमूल कांग्रेस का गठन किया था और एक दशक के भीतर ही तृणमूल कांग्रेस ने एक मज़बूत विपक्ष की भूमिका संभाल ली है.

संबंधित समाचार