सीमा पार कराने वाले दो गाइड लापता

भारत पाकिस्तान नियंत्रण रेखा
Image caption घुसपैठ रोकने की कोशिश में भारतीय सेना

दो पूर्व गाइड जो भारत-पाकिस्तान नियंत्रण रेखा के पास चरमपंथियों को भारत प्रशासित कश्मीर ले जाते थे वो पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर से लापता हैं. उनके रिश्तेदारों ने इसकी जानकारी दी.

रिश्तेदारों के मुताबिक़ पाकिस्तानी ख़ुफ़िया विभाग के अधिकारियों ने दोनों को उनके घर से 25 मई को उठा लिया था.

नीलम घाटी के अथमुक़ाम शहर के स्थानीय अधिकारी इन आरोपों की जांच कर रहे हैं.

स्थानीय लोगों का कहना है कि जांच तब शुरू हुई जब ग़ुस्साए लोगों ने बुधवार को नीलम घाटी को मुज़फ़्फराबाद से जोड़ने वाली सड़क को जाम कर दिया था.

ज़ुलफान बीबी ने बीबीसी को बताया कि ख़ुफ़िया विभाग के दो अधिकारियों ने उनके पति मोहम्मद इक़बाल से साथ चलने को कहा संभवत: चरमपंथियों को सीमा के उस पार ले जाने के लिए.

ज़ुलफान ने कहा, ‘’मेरे पति उनके साथ जाने के लिए तैयार नहीं थे. उन्होंने अधिकारियों से कहा कि वो बूढ़े हो रहे हैं, उनकी आख़ों की रौशनी भी कम हो रही है, लिहाज़ा उनके लिए उन रास्तों पर चलना अब संभव नहीं है. मैंने भी उनसे कहा कि वे मेरे पति को ना ले जाए लेकिन अधिकारियों ने धमकी दी कि अगर मेरे पति नहीं जाएगें तो इसका अंजाम बुरा होगा.शाम में अधिकारियों ने मुझे सूचना दी कि मेरे पति सीमा के उस पार चले गए हैं और उसके बाद से उन्होंने उन लोगों से कोई संपर्क नहीं किया है. ’’

मोहम्मद इक़बाल के भाई फ़िरोज़ ख़ान कियानी ने बीबीसी को बताया, "हम लोग अपने रिश्तेदारों के बारे मे पता लगाने के लिए एजेंसी के डीपु( पाकिस्तानी ख़ुफ़िया विभाग आईएसआई के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला स्थानीय शब्द) गए लेकिन उन्होंने किसी भी जानकारी से इनकार किया. दूसरे दिन हम लोग उपायुक्त के दफ़्तर गए लेकिन घंटों इंतज़ार करने के बाद भी उपायुक्त से नहीं मिल सके.’’

फ़लाकान गांव की एक दूसरी महिला तसलीम बीबी ने भी बीबीसी को इसी तरह की कहानी सुनाई. बुधवार को लोग सड़को पर आ गए और रास्ता जाम कर दिया.

उसके बाद प्रशासन ने एक अधिकारी को लोगों से बात करने के लिए भेजा जिसने लापता लोगों के रिश्तेदारों का बयान दर्ज किया.

नीलम घाटी के उपायुक्त शाहिद अय्युब ने बीबीसी से इस बात की पुष्टि कर दी है कि उन्हें 25 मई से दो लोगों के लापता होने की शिकायत मिली है और उन्होंने जांच के आदेश दे दिए हैं.

शाहिद अय्युब ने कहा, ‘’ दो लोगों के लापता होने के छह दिनों बाद रिश्तेदारों ने शिकायत दर्ज की इसलिए संभव है कि दोनों लोग अपनी मर्ज़ी से गए होंगे.’’

गोलीबारी का शिकार गांव

पाकिस्तानी ख़फ़िया विभाग पर आरोप लगते रहे हैं कि वो लगभग दो दशकों से चरमपंथियों को भारत प्रशासित कश्मीर में घुसपैठ करने में मदद कर रहा है.

वहीं भारत पर भी आरोप लगता रहा है कि वो जवाबी कार्रवाई के तहत पाकिस्तानी गावों पर भारी गोलेबारी करता है जहां चरमपंथियों के प्रशिक्षण शिविर हैं.

नीलम घाटी सबसे ज़्यादा प्रभावित इलाक़ों मे से है.पिछले 14 सालों से इस क्षेत्र में आम जीवन अस्त-व्यस्त है, ज़्यादातर लोग बंकरों में रहते हैं, अधिकतर स्कूल और अस्पताल या तो ध्वस्त हो चुकें हैं या चरमपंथियों ने क़ब्ज़ा कर लिया है.

2004 में नियंत्रण रेखा के दोनों तरफ़ युद्ध विराम लागू होन के बाद से लोगों ने सामान्य जीवन व्यतीत करना शुरू किया था लेकिन अब वो फिर चिंतित हैं कि चरमपंथी संगठनों के इस क्षेत्र में दोबारा सक्रिय होने से उन्हें फिर बंकरों में रहना पड़ सकता है.

चरमपंथी ज़्यादातर पंजाबी और पख्तून हैं और उन्हें भारत प्रशासित कश्मीर जाने के लिए स्थानीय गाइड और सामान ढोने वालों की ज़रूरत होती है.

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