तालेबान से शांति समझौते का समर्थन

काबूल में जिरगा
Image caption इस शांति जिरगा के फ़ैसले सरकार के लिए बाध्यकारी नहीं हैं

अफ़ग़ानिस्तान में जिरगा ने राष्ट्रपति हामिद करज़ई के तालेबान से शांति समझौते के प्रयासों का समर्थन किया है.

तीन दिनों तक चले जिरगा में देश में पिछले नौ साल से चल रहे गृह युद्ध को समाप्त करने की करज़ई की योजना पर जमकर बहस हुई.

आख़िरकार शुक्रवार को बैठक की समाप्ति के बाद लोगों ने तालेबान को आम माफ़ी और उनको रोज़गार दिए जाने की पेशकश की हिमायत की.

लेकिन वहां मौजूद संवाददाताओं का कहना है कि इसकी बहुत कम संभावना है कि तालेबान ऐसे किसी भी समझौते के लिए तैयार होंगे.

तालेबान शुरू से कहते रहे हैं कि वे विदेशी सैनिकों के अफ़ग़ानिस्तान छोड़कर जाने के बाद ही सरकार से बात करेंगे.

तालेबान अमरीकी समर्थित सरकार का तख़्ता पलटने और एक लाख तीस हज़ार विदेशी सेना को देश से भगाने के लिए पिछले नौ सालों से लड़ रहे हैं.

अमरीका, ब्रिटेन और संयुक्त राष्ट्र मुख्य धारा में शामिल होने को तैयार तालेबान नेताओं से समझौता करने के पक्षधर हैं और वे इस योजना को लागू करने के लिए हामिद करज़ई की सहायता करने को तैयार हैं.

कितनी रियायत?

काबूल में बीबीसी संवाददाता मार्टीन पेशेन्स का कहना है कि हालांकि जिरगा ने करज़ई के प्रस्ताव का सैद्धांतिक रूप से समर्थन किया है लेकिन तालेबान को कितनी रियायत दी जानी चाहिए इसको लेकर सहमति नहीं बन सकी.

करज़ई ने अफ़ग़ानिस्तान के संविधान को स्वीकार करने वाले छोटे तालेबान लड़ाकों को आम माफ़ी और उन्हें देश की मुख्यधारा में जोड़ने की बात कही है.

करज़ई ने शांति वार्ता शुरू करने के लिए तालेबान के कुछ नेताओं को दूसरे इस्लामिक देशों में शरण देने का भी प्रस्ताव रखा है.

जिरगा के उपाध्यक्ष क़यामुद्दीन कशफ़ ने कहा कि जिरगा में शामिल कुछ वरिष्ठ नेता चाहते हैं कि सरकार संयुक्त राष्ट्र की सूची में से उन तालेबान नेताओं का नाम हटवाए जिनको पकडे़ जाने या मार डालने के निर्देश हैं.

कशफ़ ने कहा कि सरकार को अंतरराष्ट्रीय समुदाए से विचार विमर्श कर उन नेताओं के नाम को संयुक्त राष्ट्र की सूची से हटाने के लिए तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए.

कशफ़ ने अंतरराष्ट्रीय सेना से पूर्व तालेबान नेताओं की सुरक्षा सुनिश्चित किए जाने और अमरीका तथा अफ़ग़ानिस्तान के जेलों में क़ैद तालेबान को रिहा किए जाने की अपील की.

कशफ़ ने कहा, ‘’ हम चाहते हैं कि अफ़ग़ान सरकार और अंतरराष्ट्रीय सेना ग़लत सूचना और अपुष्ट आरोपों के आधार पर देश के विभिन्न जेलों में बंद लोगों को रिहा करने के लिए जल्द से जल्द गंभीर क़दम उठाए.''

अब ये अफ़ग़ान सरकार पर निर्भर करता है कि वो जिरगा के किन सुझावों को मानती है लेकिन ज़्यादातर अफ़गा़न और पश्चिमी अधिकारियों की राय है कि तालेबान से कोई भी समझौता इतनी जल्दी मुमकिन नहीं है.

इस जिरगा के फ़ैसले को एक लंबे और जटिल प्रक्रिया की शुरूआत के तौर पर देखा जा रहा है.

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