सेना के उपयोग पर विचार विमर्श

माओवादी
Image caption इस समय राज्य की पुलिस और अर्धसैनिक बल मिलकर माओवादियों का सामना कर रहे हैं

रक्षामंत्री एके एंटनी ने कहा है कि थल सेना और वायुसेना के प्रमुख इस बात पर चर्चा कर रहे हैं कि माओवादियों या नक्सलियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई में सेना का उपयोग किया जाना चाहिए या नहीं.

उन्होंने कहा कि ये आंतरिक सुरक्षा का गंभीर मसला है और इस पर सार्वजनिक रुप से चर्चा नहीं की जा सकती लेकिन जब भी दोनों सेनाओं के प्रमुख कोई सुझाव देंगे तो इससे अवगत करवा दिया जाएगा.

उल्लेखनीय है कि बढ़ती माओवादी हिंसा की वजह से यह माँग बढ़ती जा रही है कि माओवादियों से निबटने के लिए सेना का उपयोग किया जाना चाहिए.

लेकिन थल सेना और वायु सेना दोनों के ही प्रमुख इस सुझाव को ठुकरा चुके हैं. उनका कहना है कि सेना को दुश्मनों से लड़ने के लिए प्रशिक्षित किया गया है और उनका उपयोग देश के भीतर अपने ही लोगों के ख़िलाफ़ करना उचित नहीं होगा.

हालांकि वायुसेना ने अपने एक हेलीकॉप्टर पर हुए हमले के बाद सरकार से यह अनुमति माँगी थी कि जब उन पर हमला हो तो वे आत्मरक्षा में गोलीबारी कर सकें.

दूसरी ओर सैद्धांतिक रुप से माओवादियों का समर्थन करने वाले लोग और मानवाधिकार कार्यकर्ता भी इसका विरोध करते हैं. उनका तर्क है कि सेना के लिए माओवादियों की पहचान करना कठिन होगा और ऐसे में आम लोग मारे जाएंगे.

लेकिन दंतेवाड़ा में 76 सीआरपीएफ़ जवानों के मारे जाने और फिर एक बस को उड़ाने की घटना के बाद से माओवादियों के ख़िलाफ़ सेना के उपयोग की मांग बढ़ी है और मिदनापुर में रेल दुर्घटना के पीछे कथित रुप से माओवादियों का हाथ होने की चर्चा होने के बाद यह दबाव बढ़ा है.

'सावधानीपूर्वक विचार'

ख़बरें हैं कि रक्षामंत्री एंटनी ने गत मंगलवार को थल, वायु और नौसेना के प्रमुखों से इस विषय पर च्रर्चा की है कि माओवादियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई में सेना का उपयोग होना चाहिए या नहीं.

इस बैठक में थलसेना प्रमुख जनरल वीके सिंह, नौसेना प्रमुख एडमिरल निर्मल वर्मा और वायुसेना प्रमुख एयरचीफ़ मार्शल प्रदीप नाइक के अलावा रक्षा सचिव प्रदीप कुमार भी मौजूद थे.

एक कार्यक्रम के सिलसिले में लखनऊ पहुँचे रक्षामंत्री एंटनी ने कहा, "हम इस पर जल्द ही फ़ैसला ले लेंगे."

उन्होंने कहा, "सरकार माओवादियों के ख़िलाफ़ सेना के उपयोग के विभिन्न पहलुओं पर और इससे होने वाले फ़ायदे-नुक़सान पर सावधानीपूर्वक विचार कर रही है. "

दरअसल फ़ैसला केंद्रीय मंत्रिमंडल की सुरक्षा मामलों की समिति को लेना है और यह समिति क्या फ़ैसला लेती है यह बहुत कुछ इस पर निर्भर करेगा कि सेना इस पर क्या सोचती है.

इस समय थल सेना पुलिस और अर्धसैनिक बलों को प्रशिक्षण देती है और वायुसेना का उपयोग राहत और बचाव कार्यों के लिए होता है.

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