भोपाल गैस कांड: आठ लोग दोषी क़रार

भोपाल गैस त्रासदी

भोपाल गैस त्रासदी मामले में अदालत ने आठ लोगों को दोषी क़रार दिया है. लेकिन अभी सज़ा नहीं सुनाई गई है.

इसमें यूनियन कार्बाइड से जुड़े केशव महिंद्रा, वीपी गोखले, किशोर कामदार, एसपी चौधरी, आरबी रॉय चौधरी, केवी शेट्टी, जे मुकुंद और एसआई कुरैशी शामिल हैं.

केशव महिंद्रा यूनियन कार्बाइड की भारत इकाई के प्रमुख थे जबकि वीपी गोखले प्रबंध निदेशक थे.

इनमें से आरबी रॉय चौधरी की मौत हो चुकी है.

इन लोगों को धारा 304 (ए) और धारा 304 के तहत दोषी क़रार दिया गया है जो भारी लापरवाही के कारण मौत से संबंधित हैं.

इस मामले में यूनियन कार्बाइड के प्रमुख वॉरेन एंडरसन फ़रार घोषित किए गए हैं, फ़ैसले में उनके बारे में कुछ नहीं कहा गया है.

मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट मोहन तिवारी ने ये फ़ैसला सुनाया.

इस मामले में सुनवाई लगभग 25 वर्ष चली और इसी साल 13 मई को पूरी हुई थी.

फ़ैसले के बाद भोपाल गैस पीड़ितों का मामला उठाने वाले अब्दुल जब्बार ने बीबीसी से बातचीत में कहा,'' पहले औद्योगिक त्रासदी हुई और अब न्यायिक त्रासदी हो रही है. मामला दफा 304 के तहत चलाया गया जिसमें दो साल की सज़ा होती है और कुछ हज़ार रुपए जु्र्माना लगता है.''

उनका कहना था कि अब वो इस मामले की धाराओं को उच्च अदालत में चुनौती देंगे.

इस घटना को सबसे पहले उठाने वाले पत्रकार राजकुमार केसवानी का कहना था,'' ये न्याय की दिशा में पहल क़दम है. पर ये लापरवाही का मामला नहीं बल्कि जनसंहार का मामला है.''

त्रासदी

ग़ौरतलब है कि 25 साल पहले 2/3 दिसंबर, 1984 को भोपाल स्थित यूनियन कार्बाइड कारखाने से रिसी जहरीली मिथाइल आइसोसायनेट गैस के कारण हज़ारों लोग मारे गए थे और अनेक लोग स्थायी रूप से विकलांग हो गए थे.

भोपाल गैस त्रासदी पूरी दुनिया के औद्योगिक इतिहास की सबसे बड़ी दुर्घटना मानी जाती है.

दिसंबर की उस सुबह मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में यूनियन कार्बाइड की फैक्टरी से निकली ज़हरीली गैस ने हज़ारों लोगों की जान ले ली थीं.

उस सुबह यूनियन कार्बाइड के प्लांट नंबर 'सी' में हुए रिसाव से बने गैस के बादल को हवा के झोंके अपने साथ बहाकर ले जा रहे थे और लोग मौत की नींद सोते जा रहे थे.

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक इस दुर्घटना के कुछ ही घंटों के भीतर तीन हज़ार लोग मारे गए थे.

हालांकि ग़ैरसरकारी स्रोत मानते हैं कि ये संख्या करीब तीन गुना ज़्यादा थी. मौतों का ये सिलसिला बरसों चलता रहा.

इस दुर्घटना के शिकार लोगों की संख्या हज़ारों तक बताई जाती है.

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