'मध्यप्रदेश सरकार फ़ैसले के ख़िलाफ़ अपील करेगी'

शिवराज सिंह चौहान, मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री
Image caption भोपाल गैस त्रासदी पर अदालती फ़ैसले को लेकर राजनीतिक बयानबाज़ी तेज़ हुई है

भोपाल गैस कांड में 'पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए' मध्यप्रदेश सरकार ने निचली अदालत के फ़ैसले को चुनौती देने का फ़ैसला किया है.

राज्य के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बुधवार को संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि 'पीड़ितों के साथ न्याय नहीं हुआ है और राज्य सरकार इनको न्याय दिलाएगी.'

उल्लेखनीय है कि भोपाल की निचली अदालत ने सात जून को भोपाल गैस त्रासदी मामले में सभी आठ दोषियों को दो-दो साल की सज़ा सुनाई थी.

उधर भारत की केंद्र सरकार ने गृह मंत्री पी चिदंबरम के नेतृत्व में एक मंत्रियों के ग्रुप का गठन किया है जो इस मामले से जुड़े विभिन्न पहलुओं की छानबीन करेगा.

मंत्रियों के इस ग्रुप में ग़ुलाम नबी आज़ाद, वीरप्पा मोइली, जयपाल रेड्डी, कमलनाथ, शैलजा, एमके अलागिरी, पृथ्वीराज चौहान और जयराम रमेश होंगे.

'सज़ा बढ़ाई जाए'

शिवराज सिंह ने कहा कि पीड़ितों को निचली अदालत के फ़ैसले के ख़िलाफ़ अपील करने का हक़ है.

चौहान ने कहा, "इस मामले में पीड़ित भोपाल की जनता है और राज्य सरकार उनका प्रतिनिधितत्व करती है. लिहाज़ा राज्य सरकार ने दोषियों की सज़ा बढ़वाने के लिए,पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए अपील करने का फ़ैसला किया है."

इस मामले से जुड़े क़ानूनी पहलुओं का अध्ययन करने के लिए उन्होंने पांच सदस्यीय समिति का भी गठन करने का भी फ़ैसला किया है.

बुधवार को शिवराज सिंह ने केंद्र सरकार पर भी निशाना साधा है.

उन्होंने कहा कि जिस गंभीरता से सज़ा दिलवाने का काम किया जाना चाहिए था वह नहीं हुआ. उन्होंने ये भी सवाल उठाया कि आख़िर केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले के ख़िलाफ कोर्ट में पुनर्विचार याचिका क्यों नहीं थी.

एंडरसन के ख़िलाफ़ मामला

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि आख़िर केंद्र सरकार को ये कहने की नौबत ही क्यों आई कि यूनियन कार्बाइड के प्रमुख वॉरेन एंडरसन के ख़िलाफ़ मामला अभी बंद नहीं हुआ है.

ग़ौरतलब है कि केंद्रीय क़ानून मंत्री वीरप्पा मोइली ने कहा था कि क़ानूनी और तकनीकी रूप से नहीं कहा जा सकता कि एंडरसन के ख़िलाफ़ मामला बंद हो गया है. उनके ख़िलाफ़ मामला अभी जारी है.

केंद्रीय पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश ने भी अदालती फ़ैसले को बेहद असंतोषजनक क़रार दिया है. उन्होंने ये भी कहा कि इतने अर्से के बाद इस तरह के फ़ैसले पर लोगों की नाराज़गी समझ में आने वाली बात है.

जयराम ने कहा कि साल के अंत तक 'हरित न्यायाधिकरण' की स्थापना की जाएगी ताकि ऐसे मामलों में पीड़ितों को जल्द इंसाफ़ मिल सके.

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